बहादराबाद । केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि नवाचार और अनुसंधान के जरिए हम वेद में निहित ज्ञान को मानव के कल्याण के लिए उपयोग कर सकते हैं। डॉ. निशंक ने कहा कि नई शिक्षा नीति जल्द ही आने वाली है, शिक्षा नीति में हम वेद की बातों को समाहित कर सकें ऐसी हमारी कोशिश है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने अंदर केवल डिग्री पाने की चाह न रखते हुए वेद की ऋचाओं को आगे फैलाने के बारे में सोचें।
शनिवार को उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय वैदिक संगोष्ठी के समापन पर मुख्य अतिथि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वेद हमारी प्राचीन धरोहर है। वेद ज्ञान विज्ञान दोनों का मिश्रण है, जिसे केवल नवाचार के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है और हमारे संस्कृत विश्वविद्यालय इस कार्य को बखूबी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की चिंता से ग्रस्त विश्व को यदि मुक्ति पानी है तो हमें वैदिक वाङ्गमय की शरण लेनी होगी।
कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि वेद ऐसी विद्या है जिसका अध्ययन करने से निश्चय ही व्यक्ति को समाधान मिलते हैं, उस विद्या का कोई महत्व नहीं होता जो दूसरों को लाभ न दे सके। उन्होंने कहा कि मनुष्य जब तक जिंदा है वेद का संरक्षण होता रहेगा। संगोष्ठी का सार संयोजक डॉ. अरुण कुमार मिश्र ने प्रस्तुत किया और संचालन डॉ. कंचन तिवारी ने किया। इस अवसर पर श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ नई दिल्ली के कुलपति रमेश कुमार पांडे, संस्कृत सचिव विनोद रतूड़ी, उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष प्रेमचंद शास्त्री, प्रोफेसर विरुपाक्ष वी चड्डी पाल, राष्ट्रीय वेद विद्यापीठ प्रतिष्ठान उज्जैन के सचिव सचिव सांदीपनि, गिरीश कुमार अवस्थी, प्रो. मोहन चंद्र बलोदी, प्रो. दिनेश चंद्र चमोला, डॉ. प्रतिभा शुक्ल, डॉ. कामाख्या आदि मौजूद रहे।