सीपीयू के जवानों ने भेल क्षेत्र में चेकिंग के दौरान किशोरी को रोका। पता चला कि वह नाबालिग है। सीपीयू ने चालान कर दिया। चालान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अखिल वोहरा की अदालत में पहुंचा।
इस चालान के निस्तारण के दौरान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने नाबालिग बेटी को दोपहिया वाहन दिए जाने को गंभीर मामला मानते हुए पिता को तलब किया। शुक्रवार को इस मामले में हुई सुनवाई के दौरान किशोरी के पिता ने अपराध स्वीकार किया।
न्यायालय ने पिता पर 27, 500 रुपए का अर्थदंड लगाने के साथ ही एक दिन की सजा भी सुनाई। पिता को पूरे दिन न्यायालय के कटघरे में खड़ा रहना पड़ा।