हरिद्वार के एक शिक्षण संस्थान में एक कुलपति के ऊपर दूसरा कुलपति है। शायद
देश में यह इकलौता उदाहरण होगा जहां महाविद्यालय में भी कुलपति बैठता हो।
गुरुकुल
महाविद्यालय ज्वालापुर में पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा, शास्त्री, आचार्य
और बीएड पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इस महाविद्यालय को सरकार से भी
वित्तीय सहायता मिलती है। यह महाविद्यालय, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय
से मान्यता प्राप्त है। विवि के वर्तमान कुलपति डा. महावीर अग्रवाल हैं।
जबकि गुरुकुल महाविद्यालय में डा. हरिगोपाल शास्त्री कुलपति हैं। शायद इस
तरह का यह देश में पहला मामला है जहां महाविद्यालय स्तर पर भी कोई कुलपति
बैठता हो। कई लोगों को इसको लेकर भ्रम की स्थिति है कि कुलपति किसे समझा
जाए। डा. विपुल, मनोज कुमार, अशोक कुमार, सुरेश राणा और मृदुल आदि का कहना
है कि एक महाविद्यालय में कुलपति कैसे हो सकता है।
इनका है कहना
महाविद्यालय
में कुलपति की नियुक्ति समझ में परे है। गुरुकुल महाविद्यालय, उत्तराखंड
संस्कृत विवि से संबद्ध है। ऐसे में या तो उन्हें अपना विवि बनाना चाहिए।
या फिर इसका नाम बदल देना चाहिए।
-प्रो. महावीर अग्रवाल, कुलपति, उत्तराखंड संस्कृत विवि।
उत्तराखंड
संस्कृत विवि से केवल हमारी मान्यता है। इसके अलावा विवि से हमें कुछ
लेना-देना नहीं है। गुरुकुल को महासभा चलाती है और मैं संस्था का कुलपति
हूं।
-डा. हरिगोपाल शास्त्री, कुलपति, गुरुकुल महाविद्यालय।