हरिद्वार। नगर निगम 13वें वित्त आयोग से प्राप्त 7 करोड़ 13 लाख 10 हजार रुपये की अनुदान राशि के हिसाब में फंस गया है। चार किश्तों में मिली इस राशि के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) नगर निगम की ओर से अभी तक भी शासन को उपलब्ध नहीं कराया गया।
नालों की सफाई का भुगतान भी ठेकेदारों को अभी तक नहीं किया गया है। इसके खिलाफ ठेकेदारों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस पर हाईकोर्ट ने भुगतान के आदेश दिया है। इस आदेश का हवाला देते हुए नगर निगम के नगर आयुक्त ने शासन को पत्र भेजकर नालों की सफाई का भुगतान 14वें वित्त आयोग के अनुदान से करने की अनुमति मांगी थी। शासन ने इसी पत्र को आधार बनाकर अब स्पष्टीकरण तलब किया है।
इसके तहत निगम से 13वें वित्त आयोग से प्राप्त अनुदान राशि के किश्तवार खर्च का उपयोगिता प्रमाणपत्र अभी तक नहीं देने का कारण बताने के साथ पूछा है कि नालों की सफाई का भुगतान 13वें वित्त आयोग से प्राप्त अनुदान से क्यों नहीं किया। शासन इस बात पर ज्यादा गौर इसलिए कर रहा है क्योंकि जिस समय नालों की सफाई का भुगतान बकाया बताया जा रहा है उस समय निगम के पास 13वें वित्त आयोग का पैसा था।
फिर निगम ने नालों की सफाई का भुगतान क्यों नहीं किया। जबकि अनुदान राशि के शासनादेश में अनुदान को सफाई उपकरण खरीदने, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था करने, जल-मल की सफाई व कीटनाशकों की खरीद आदि पर खर्च किए जाने का प्रावधान था। 13वें वित्त आयोग की अनुदान राशि खर्च करने में आशंका के चलते शासन ने निगम को 14वें वित्त आयोग से जारी प्रथम किश्त के ढाई करोड़ रुपये खर्च करने की अनुमति अभी तक नहीं दी है।
स्पष्टीकरण किया तलब
नगर आयुक्त विप्रा त्रिवेदी ने पुष्टि की है कि शासन ने नालों की सफाई का भुगतान 13वें वित्त आयोग से क्यों नहीं किया है को लेकर स्पष्टीकरण तलब किया है। 13वें वित्त आयोग की अनुदान राशि के खर्च का उपयोगिता प्रमाणपत्र भी मांगा है। लेखा विभाग खर्च का विवरण तैयार कर रहा है। जल्द शासन को स्थिति से अवगत कराया दिया जाएगा।