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ट्रेड यूनियनों ने श्रमिक विरोधी और निजीकरण की नीतियों के विरोध में दिया धरना

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भगत सिंह चौक पर प्रदर्शन करते संयुक्त ट्रेड यूनियन्स समन्वय समिति के पदाधिकारी । - फोटो : HARIDWAR
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संयुक्त ट्रेड यूनियन समन्वय समिति ने सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के विरोध में धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद मांगों के संबंध में सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया गया।
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बुधवार को भगत सिंह चौक पर धरना देते हुए एटक के जिलाध्यक्ष मुनरिका यादव और सीटू के जिलाध्यक्ष पीडी बलूनी ने कहा कि केंद्र सरकार मजदूर विरोधी कानून बना रही है। सरकार श्रम संगठनों से वार्ता करना भी उचित नहीं समझ रही है। कोरोना आपदा में सरकार देश की जनता और कर्मचारियों के अधिकारों में कटौती कर रही है। उन्होंने मांग की कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सार्वभौमिक बनाया जाए, बढ़ती महंगाई पर रोक लगाई जाए, रोजगार सृजन के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा कर्मचारियों की भर्ती पर लगी रोक को तत्काल हटाया जाए, समाप्त किए गए पदों को पुनर्जीवित किया जाए, श्रम कानूनों में किए मजदूर विरोधी संशोधनों को निरस्त किया जाए और न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये तथा न्यूनतम पेंशन 10 हजार रुपये की जाए। इंटक के राष्ट्रीय महासचिव राजबीर चौहान ने कहा कि केंद्र व राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश एवं निगमीकरण की नीति को पूर्णतया समाप्त किया जाए। भविष्य निधि की पात्रता के लिए सीलिंग को समाप्त कर सभी कामगारों को लाभ दिया जाए। पुरानी पेंशन नीति को बहाल किया जाए। कोरोना महामारी के समाप्त होने तक और कारोबार सुचारु रूप से चलने तक सभी लोगों को मुफ्त अनाज दिया जाए।
इस मौके पर प्रेमचंद सीमरा, मुकेश धीमान, मनीष सिंह, राधेश्याम, नवीन कुमार, योगेंद्र राम, रणवीर सिंह, आशुतोष, योगेंद्र सिंह, नरेश कुमार, सौरभ त्यागी, संदीप चौधरी, मनमोहन, नईम खान, आईडी पंत, दिनेश सलोनिया, रवि प्रताप राय, एमएस त्यागी, सुनील नेगी, प्रवीण कुमार व संजय शर्मा आदि मौजूद रहे।
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