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डेंगू को न्योता दे रहा अस्पताल, जंबों मशीन आधे दिन बाद बेकार

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बदलते मौसम के साथ धर्मनगरी में डेंगू फैलने का खतरा पैदा हो गया है। जिला अस्पताल परिसर के अंदर और बाहर फैला पानी ही डेंगू को न्योता दे रहा है। डेंगू की बीमारी से बचाव के लिए जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 18 लाख रुपये की लागत से अफरेसिस मशीन लगाई गई है लेकिन स्टाफ के अभाव में यह मशीन भी आधे दिन बाद बेकार हो जाती है। ऐसे में अगर डेंगू के मरीज आए तो यह मशीन लोगों के कम काम आएगी।
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मेला अस्पताल के बाहर और अंदर पानी जमा है। ऐसे में लोगों के डेंगू की चपेट में आने की संभावना बनी हुई है। उधर, मेला अस्पताल के पास हर मिलाप मिशन राजकीय जिला अस्पताल के रक्तदान केंद्र में एक साल पहले डेेंगू से रोगियों को बचाने के लिए 18 लाख रुपये की लागत से लगी अफरेसिस मशीन लोगों के ज्यादा काम नहीं आ रही है। इस मशीन की एक जंबो यूनिट से लगभग 60 हजार प्लेटलेट्स बढ़ जाते हैं। मशीन के होने से रोगी को 10 रक्तदाताओं की आवश्यकता नहीं पड़ती है। 10 रक्तदाताओं के बराबर एक जंबो यूनिट काम करती है। इससे डेंगू के रोगियों को बचाने में काफी मदद मिलती है लेकिन स्टाफ के अभाव में आधे दिन बाद अस्पताल प्रशासन इसका पूर्ण रूप से लाभ नहीं ले पा रहा है। इस समय ब्लड बैंक में पांच लैब टैक्नीशियन, एक टैक्नीकल सुपरवाइजर, एक स्टाफ नर्स, दो लैब असिस्टेंट और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही तैनात है, जबकि मशीन को पूरे समय यानी 24 घंटे चलाने के लिए एक मेडिकल ऑफिसर, दो स्टाफ नर्स और तीन लैब टैक्नीशियन की आवश्यकता है। पूरा स्टाफ नहीं होने से मशीन को तीन बजे के बाद नहीं चलाया जाता है क्योंकि उस समय ब्लड स्टाफ अपने घर चला जाता है। इससे मशीन जिस उद्देश्य के लिए लगाई गई थी, वह पूरा होता नहीं दिख रहा है। ऐसे में अगर डेंगू के केस बढ़ जाएं तो मशीन होने के बाद भी अधिक लोगों को लाभ नहीं पहुंचा पाएंगे।
स्टाफ बढ़ाने के लिए कई बार विभागीय पत्राचार किया गया लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। जिससे अफरेसिस मशीन को 24 घंटे नहीं चलाया जा रहा है।
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अस्पताल परिसर में रोजाना साफ-सफाई की जाती है। अगर कहीं पानी है तो उसको भी सफाई करा दी जाएगी।
ऐसे करती है अफरेसिस मशीन काम
अफरेसिस मशीन से केवल प्लेटलेट्स निकाली जाती हैं। उसमें ब्लड निकालने की आवश्यकता नहीं पड़ती है, इसलिए प्लेटलेट्स देने वाले व्यक्ति में कोई ज्यादा कमजोरी नहीं आती है, जबकि सामान्य रूप से ब्लड देकर प्लेटलेट्स देने पर ब्लड और अन्य कई चीजें निकलती हैं। इनमें से प्लेटलेट्स को बाद में अलग करना पड़ता था।
कौन कर सकता है जंबो पैक डोनेट
हरिद्वार। रक्तदान केंद्र के प्रभारी डॉ. रविंद्र चौहान का कहना है कि जंबो पैक डोनेट करने वाले व्यक्ति का वजन 60 किलोग्राम और प्लेटलेट्स डेढ़ लाख से अधिक होने चाहिए। यह व्यक्ति 48 घंटे बाद दोबारा भी जंबो पैक डोनेट कर सकता है। पिछले एक वर्ष में इस जंबो मशीन का लाभ 50 लोग ले चुके हैं।
यह है शुल्क
हरिद्वार। रक्तदान केंद्र प्रभारी डॉ. रविंद्र चौहान ने बताया कि जंबो पैक के लिए रोगियों को सरकारी अस्पताल में नौ हजार रुपये और प्राइवेट अस्पताल में 12 हजार रुपये फीस देनी होती है। इसी फीस में डेंगू से संबंधित टेस्ट भी शामिल होते हैं।
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डेंगू से बचने के उपाय
-आसपास की जगहों पर साफ-सफाई बनाए रखें।
- पूरे शरीर को कपड़ों से ढककर रखें।
- मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें।
- घरों के आसपास पानी इकठ्ठा न होने दें।
- कूलर और बर्तनों का पानी बदलते रहें।
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