हरिद्वार। नगर निगम हरिद्वार, रुड़की एवं पालिका परिषद मंगलौर में 13वें वित्त आयोग से प्राप्त अनुदान राशि से एलईडी लाइट खरीदने में हुए घोटाले और टेंडर प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं की जांच शुरू हो गई है। डीएम की ओर से नामित जांच अधिकारी, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने शनिवार को तीनों संस्थाओं के अधिकारियों को एलईडी लाइट खरीद संबंधी अभिलेखों के साथ तलब किया था। लेकिन अधिकारी वांछित अभिलेख नहीं दिखा पाए।
निगम हरिद्वार की ओर से पथ-प्रकाश के अवर अभियंता केबी उपाध्याय पहुंचे थे। लेकिन वह इसका जवाब नहीं दे पाए कि जो फर्म ब्लैकलिस्ट थी उससे एलईडी क्यों खरीदी गई। उपाध्याय ने बताया कि फर्म के बारे में बाद में पता चला। इस पर जांच अधिकारी ने कहा कि पता चलने के बाद तो कार्रवाई की जा सकती थी। यह भी बात सामने आई कि एक बार के टेंडर पर कई पार एलईडी खरीदी गई। अवर अभियंता केबी उपाध्याय उपयोगिता प्रमाणपत्र तक भी नहीं दिखा पाए। नगर निगम रुड़की से मुख्य नगर अधिकारी गोपाल चौहान व सहायक नगर अधिकारी उत्तम सिंह नेगी अभिलेखों के साथ उपस्थिति हुए। लेकिन जांच के लिए अभिलेख व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पाए। नगरपालिका परिषद मंगलौर का प्रतिनिधि भी आधी-अधूरी जानकारी के साथ पहुंचे थे। इस पर जांच अधिकारी ने तीनों संस्थाओं के अधिकारियों को एलईडी लाइट की खरीद संबंधी प्रत्येक कागज की नंबरिंग कर फाइल में आठ अप्रैल को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
शासन स्तर पर बनी जांच कमेटी
जांच के दौरान अपर जिलाधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि नगर निकायों में एलईडी लाइट खरीद में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच के लिए शासन स्तर पर भी कमेटी गठित की गई है। शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिंह पंवार के निर्देश पर शहरी विकास निदेशालय के निदेशक डॉ. वी. षणमुगन द्वारा जारी आदेश में निदेशालय के वरिष्ठ वित्त अधिकारी एवं शहरी विकास विभाग में अधिशासी अभियंता की जांच कमेटी गठित की है।