हरिद्वार। लॉकडाउन के दौरान हो रही परेशानी के कारण बेरोजगारी भत्ता देने की मांग को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर दिए जा रहे धरने के दौरान महिलाओं का दर्द छलक पड़ा। महिलाओं ने आरोप लगाया कि निजी फाइनेंस समूहों द्वारा दिए गए लोन की वसूली करने आने वाले कर्मचारी घरों पर आकर गाली गलौज और अभद्रता कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे समूहों की वसूली पर फिलहाल रोक लगाने और सरकार से राहत पैकेज देने की मांग की।
सोमवार को बड़ी संख्या में रिक्शा चालक सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर जमा हुए। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि लॉकडाउन के कारण काम पूरी तरह ठप है। काम नहीं चल पाने के कारण सभी बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है। अशोक कुमार कश्यप ने कहा कि रोजगार नहीं चल पाने के कारण बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। एक महीने से सरकार से राहत दिए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इसलिए धरना देने को मजबूर होना पड़ रहा है। बताया कि अधिकांश चालकों ने बैंक से लोन लेकर रिक्शा खरीदे हैं। काम नहीं चल पाने के कारण बैंक की किस्त भी नहीं चुका पा रहे हैं। कहा कि कठिन स्थिति का सामना कर रहे सभी बैट्री रिक्शा चालकों को 5 हजार रुपये प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता दिया जाए। साथ ही छह माह तक बिजली, पानी, गृहकर, स्कूल फीस माफ की जाए। बबीता ने कहा कि मकान मालिक किराया देने के लिए दबाव बना रहे हैं। वहीं महिलाओं द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूहों द्वारा बैंकों से लिए गए लोन के भुगतान पर छह माह तक रोक लगाई जाए। चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मांगे नहीं मानी गई तो परिवार सहित भूख हड़ताल की जाएगी। धरना देने वालों में प्रेम शर्मा, अनिल चौहान, राजेश अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, ब्रज गोपाल, राहुल अग्रवाल, गौरव, घनश्याम, हरिकिशन, संजय, अरविंद चौहान, सुबोध कुमार गुप्ता, ब्रह्मपाल, धर्मवीर, हरिओम, सुनीता, संजोगिता, मनोरमा, तारा, डिंपल, मीना शेख, मुन्नी देवी, सीमा देवी, रीना देवी, नीरू देवी, संगीता देवी, अंजलि, सरोज, सुमन, कमलेश आदि सहित अनेक लोग मौजूद रहे। धरने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन भी दिया गया।