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हरिद्वार: तीर्थ पुरोहितों ने शुरू किया धरना, बोले- गंगा के सम्मान के लिए करेंगे संघर्ष

Mon, 21 Sep 2020 09:52 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार

सार

  • हरकी पैड़ी पर बह रही धारा का नाम नहर की बजाय गंगा घोषित करने की मांग 
  • तीर्थ पुरोहितों ने शुरू किया धरना, मांग नहीं मनाने पर बेमियादी आंदोलन की चेतावनी 
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हरिद्वार में धरने पर बैठे तीर्थ पुरोहित - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरकी पैड़ी पर बह रही अविरल धारा को नहर (स्कैप चैनल) घोषित करने वाले अध्यादेश को खत्म करके गंगा नाम देने की मांग को लेकर तीर्थ पुरोहितों ने धरना शुरू कर दिया है। तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि अविरल धारा का नाम पहले की तरह गंगा घोषित करने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने इस मामले में सरकार पर ढुलमुल रवैया अपनाने का आरोप लगाया। 

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सोमवार को कई तीर्थ पुरोहित हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुंड पर पहुंचे और धरने पर बैठ गए। इस मौके पर तीर्थ पुरोहित सौरभ सिखौला ने कहा कि अब हरकी पैड़ी पर बह रही गंगा की धारा को कांग्रेस सरकार के शासनकाल में नहर घोषित कर दिया गया था। तीर्थ पुरोहित तब से ही इसका विरोध करते आ रहे हैं और पहले की तरह धारा का नाम गंगा घोषित करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद भी इस मामले में केवल आश्वासन ही मिले हैं।  अनमोल वशिष्ठ ने कहा कि श्रद्धालु गंगा स्नान और अनुष्ठान के लिए हरकी पैड़ी आते हैं। देश के करोड़ों लोगों की आस्था गंगा और हरकी पैड़ी से जुड़ी है।


ऐसे में हरकी पैड़ी पर बह रही गंगा की धारा को नहर कहना न्यायसंगत नहीं है। अनुपम जगता ने कहा कि हरकी पैड़ी के सम्मान के साथ न्याय होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि पहले एक सप्ताह तक क्रमिक धरना दिया जाएगा। इसके बाद भी सरकार ने अध्यादेश निरस्त नहीं किया तो तीर्थ पुरोहित अनिश्चितकालीन के लिए धरने पर बैठ जाएंगे। अखिल भारतीय हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष हरिमोहन तिवारी ने तीर्थ पुरोहितों को समर्थन दिया। प्रदर्शन में अशोक त्रिपाठी, प्रतीक मिश्रपुरी, वैभव शिवपुरी, सचिन कौशिक, धीरज पंचभैया, आशु झा, संजीव कुएपेवाले, सुनील दत्त चाकलान आदि तीर्थ पुरोहित शामिल रहे।

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क्या है मामला

मालूम हो कि कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंगा से दो सौ मीटर के दायरे में निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी थी। इसलिए वर्ष 2016 में हरीश रावत सरकार ने एक अध्यादेश जारी कर हरकी पौड़ी पर बह रही गंगा को स्कैप चैनल घोषित कर दिया।

उस समय  संत समाज और तीर्थ पुरोहितों ने अध्यादेश का विरोध किया था। 2017 में बीजेपी सरकार आने के बाद से लगातार संत और तीर्थ पुरोहित इस अध्यादेश को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। कुछ समय पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गंगा का नाम बदलने की गलती मानते हुए साधु संतों से माफी भी मांगी थी। उनका कहना था कि भाजपा सरकार को इस गलती में सुधार करना चाहिए। 

मुख्यमंत्री ने दिया था आश्वासन
श्री गंगा सभा ने अध्यादेश के खिलाफ हाईकोर्ट में पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत कर सरकार को चुनौती देने की घोषणा की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अध्यादेश को जल्द से जल्द निरस्त करने का आश्वासन दिया था। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक भी कई बार तीर्थ पुरोहितों से मिलकर अध्यादेश को निरस्त करने का आश्वासन दे चुके हैं।
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