जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि तप के लिए ही मनुष्य जीवन मिलता है। तप करके ही मनुष्य महान बनता है। जगद्गुरु शंकराचार्य रविवार को प्रभु हरनाथ मंदिर भागीरथी नगर, भूपतवाला में ब्रह्मलीन सदगुरुदेव 108 स्वामी हरेंद्रानंद सरस्वती महाराज की एकादश पुण्य तिथि पर आयोजित पुष्पांजलि कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि मनुष्य यूं ही महापुरुष नहीं बनता है। संघर्ष से तपकर मनुष्य महान बनता है। तप से ही संन्यासी का जीवन श्रेष्ठ है। मनुष्य उसे कहते हैं जो दूसरों के लिए जीता है। संत ही है जो दूसरों के लिए जीते हैं। साधुता ही जिनके जीवन का लक्ष्य है। उन्होंने ब्रह्मलीन स्वामी हरेंद्रानंद को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके कृतित्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि संन्यास लिया नहीं जाता है, संन्यास हो जाता है। जूना अखाड़ा के अध्यक्ष महंत भगवत गिरि की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में स्वामी प्रेम गिरि, महंत विनोद गिरि, महंत धीरेंद्र पुरी, बाबा कमल दास, महंत बाल भारती, महंत गोपाल गिरि, महंत अभिराम दास, सतपाल ब्रह्मचारी, महंत पूरण गिरि, स्वामी राम गिरि, बाबा सुमेश्वर दास, महंत केदारपुरी, महंत राम गिरि, महंत महेश्वरपुरी, स्वामी शरतपुुरी, महापौर मनोज गर्ग, पार्षद अनिल मिश्रा, विहिप के राजेंद्र पंकज, शिवदास दुबे, एमपी गर्ग, दिनेश रिखी, रमेश भाई, एसके पांडेय, राजेंद्र सिंह रजावर एडवोकेट, बागेश्वर पांडेय, काशीनाथ, कपिल तिवार,गुलाब सिंह, महेश गौड़ व कमल पांडेय ने ब्रह्मलीन स्वामी हरेंद्रानंद सरस्वती को पुष्पांजलि दी। प्रभु हरनाथ मंदिर भागीरथी नगर के संचालक एवं श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय मंत्री स्वामी देवानंद सरस्वती ने संतों का स्वागत किया।