रोशनाबाद। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) हरिद्वार की अदालत ने धोखाधड़ी और न्यायालय को गुमराह करने के आरोपी की जमानत याचिका को निरस्त कर दिया है।
आरोपी पर सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर आर्थिक लाभ के लिए गलत तरीके से जमानतें दिलाने का आरोप है। सिडकुल थाना क्षेत्र के अंतर्गत मुकदमा अभियुक्त कमलेश पुत्र देव सिंह पर पर सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर आर्थिक लाभ के लिए गलत तरीके से जमानतें दिलाने का आरोप है और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 229 (1), 336 (3), और 318 (4) के तहत मामला दर्ज है। आरोपी कमलेश 24 मार्च 2026 से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।
अदालत में हुई बहस करते हुए अभियुक्त की अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कमलेश निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है। उन्होंने दलील दी कि मामला केवल दस्तावेजों के प्रस्तुतीकरण से जुड़ा है और इसमें कोई हिंसात्मक कृत्य शामिल नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि अभियुक्त का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है।
अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन अधिकारी ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्त ने आर्थिक लाभ के लिए अदालत को गुमराह किया है जो कि एक गंभीर और अजमानतीय अपराध है। सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप कुमार ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह पाया कि अभियुक्त पर सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर षड्यंत्र रचने का गंभीर आरोप है। अदालत ने यह भी संज्ञान में लिया कि इस मामले में सह-अभियुक्त की जमानत पहले ही खारिज की जा चुकी है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। इसके साथ ही कमलेश की जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया गया।