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बदसलूकी पर बंद रहे अस्थायी अस्पताल

Fri, 12 Feb 2016 11:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार। अर्द्धकुंभ मेला क्षेत्र के कनखल स्थित दक्षदीप में बने अस्थायी अस्पताल में तैनात मेडिकल स्टाफ ने एक मेला अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाते हुए शुक्रवार दिन में स्वास्थ्य सेवाएं ठप रखी। इस दौरान डाक्टर, फार्मासिस्ट, एंबुलेंस चालक सहित सभी स्टाफ एकत्रित होकर मेला अस्पताल में पहुंचे। जहां मेला स्वास्थ्य अधिकारी से अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। यहां से कोई आश्वासन नहीं मिलने पर समस्त स्टाफ बैरागी कैंप में अधिकारी के आवास पर प्रदर्शन करने पहुंचे। जहां मेला प्रशासन के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जैसे तैसे कर निपटाया गया।  
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बृहस्पतिवार की रात को दक्षदीप क्षेत्र में सेक्टर मजिस्ट्रेट योगेंद्र सिंह निरीक्षण पर थे। इस दौरान वह क्षेत्र दक्षदीप में अस्थायी अस्पताल के सामने पहुंचे। उस समय अस्पताल के गेट पर फार्मासिस्ट अंबरीश कुमार व भारत  डोभाल खड़े हुए थे। सेक्टर मजिस्ट्रेट ने अस्पताल की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी मांगी। आरोप है कि फार्मासिस्ट जेब में हाथ डाले हुए सेक्टर मजिस्ट्रेट से बात की और प्रश्नों का जवाब भी ठीक नहीं दिया। इस पर सेक्टर मजिस्ट्रेट ने फार्मासिस्ट को फटकार लगाई। सेक्टर मजिस्ट्रेट के जाने के बाद फार्मासिस्टों में आक्रोश फैल गया। इसको लेकर सुबह को अन्य फार्मासिस्टों सहित अन्य स्टाफ को बताया। इस मामले को लेकर शुक्रवार को रोष फैल गया। जिसको लेकर मेला ड्यूटी में आए डाक्टर, फार्मासिस्ट, एंबुलेंस चालक, नर्स सहित अन्य स्टाफ एकत्रित हुए और सभी अस्थायी अस्पतालों को बंद कर मेला अस्पताल में पहुंच गए। जहां मेला स्वास्थ्य अधिकारी बीएस जंगपांगी से मिलकर सेक्टर मजिस्ट्रेट पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा कार्रवाई की मांग की। मेला स्वास्थ्य अधिकारी ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने और बैरागी कैंप में सेक्टर मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर एकत्रित हो गए। जहां जमकर नारेबाजी की।  मौके पर उप मेला अधिकारी मेहरबान बिष्ट पहुंचे। जहां सेक्टर मजिस्ट्रेट और चिकित्सा स्टाफ के बीच का मामला समझा बुझाकर शांत कराया। अपर मेलाधिकारी मेहरबान सिंह  बिष्ट ने बताया कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। गलत फहमी के चलते हुए मामला बढ़ गया था।
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चिकित्सक व फार्मासिस्ट को स्नान से एक दिन पहले एवं एक दिन बाद अलर्ट रहने के लिए निर्देशित किया है। ताकि श्रद्धालुओं को रात्रि में  दिक्कत न हो। मैं निरीक्षण पर था। पूछने पर फार्मासिस्ट ने खुद को डाक्टर बताया जो सही नहीं है।
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योगेंद्र सिंह सेक्टर मजिस्ट्रेट।
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सेक्टर  मजिस्ट्रेट ने मुझे जेब में हाथ डालने पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए थाने भिजवाकर कड़ी कार्रवाई करने की धमकी दी थी। जबकि मैं रात में ड्यूटी कर रहा था। अधिकारी है तो क्या हमारा कोई सम्मान नहीं है। शिविर में कोई परेड तो हो नहीं रही थी।
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अम्बरीश कुमार, फार्मासिस्ट।
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