गंगा में खनन खोलने का विरोध और कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर अनशन कर रहे मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने जल भी त्याग दिया है। उन्होंने खुद को आश्रम परिसर के एक कक्ष में कैद कर लिया है। उनको मनाने के लिए एसडीएम मनीष सिंह पहुंचे, लेकिन वह राजी नहीं हुए। स्वामी शिवानंद ने शनिवार से मौन पर रहने का भी ऐलान किया। उनका कहना है कि गंगा के लिए जरूरत पड़ी तो वे प्राण त्यागने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
गंगा में खनन खोले जाने के खिलाफ मातृसदन का आंदोलन उग्र हो गया है। खनन खुलने के विरोध में 11 दिनों तक मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद अनशन पर रहे। शासन और प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं होने पर 24 मई को स्वामी शिवानंद ने ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का अनशन समाप्त कराया और खुद अनशन पर बैठ गए थे। शुक्रवार से स्वामी शिवानंद ने पानी लेना भी छोड़ दिया। उन्हें मनाने के लिए एसडीएम मनीष सिंह पहुंचे और करीब दो घंटे तक उन्होंने स्वामी शिवानंद से पानी लेते रहने का आग्रह किया, लेकिन खनन पूरी तरह बंद न होने के साथ ही मुख्य सचिव एस रामास्वामी और जिलाधिकारी दीपक रावत समेत पांच अधिकारियों को निलंबित न करने तक उन्होंने उग्र आंदोलन जारी रखने की चेेतावनी दी। मेडिकल करने आई टीम को भी उन्होंने बिना जांच कराए लौटा दिया।
गाद निकालने पर होगा खनन
गंगा सहित अन्य नदियों से गाद निकालने की प्रक्रिया को मातृसदन ने भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि कभी सफाई के नाम तो कभी समतलीकरण के नाम पर अवैध तरीके से खनन होता रहा है। अब दो मामलों पर सरकार की पोल खुल चुकी है तो गाद निकालने पर अवैध तरीके से खनन कराने की साजिश है। स्वामी शिवानंद ने कहा कि सरकार खनन कराने के कितने भी तरीके निकाल ले, लेकिन गंगा में खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।