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मरीज लाचार, बिना सर्जन कैसे करवाएं इलाज

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जिला अस्पताल एक बार फिर सर्जन विहीन हो गया है। अस्पताल में तीन महीने पहले सर्जन की तैनाती हुई लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। कांवड़ मेले में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सर्जन को तैनात किया गया था। मेला खत्म होने के बाद वैकल्पिक तैनाती वाले सर्जन भी अपने मूल अस्पताल लौट गए हैं। ऐसे में अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गया है। अस्पताल से प्रतिदिन 30 से अधिक मरीज लौट रहे हैं।
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वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. चंदन मिश्रा ने बताया कि मई में सर्जन डॉ. उदय शंकर बलूनी की तैनाती हुई थी लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। अस्पताल प्रशासन को ड्यूटी ज्वाइन नहीं करने की वजह भी नहीं बताई। सर्जन की ओपीडी से जुड़े रोजाना 30 से 40 मरीज आते हैं। मजबूरन उनको हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि कांवड़ मेले में कोरेनेशन अस्पताल देहरादून के सर्जन डॉ. परमार्थ जोशी को जिला अस्पताल में तैनात किया गया था। उन्होंने इस अवधि में 160 मरीजों का इलाज किया। कांवड़ मेला संपन्न होने के बाद वा अपने मूल तैनाती वाले अस्पताल चले गए। डॉ. मिश्रा ने बताया कि सर्जन की तैनाती के लिए पत्राचार किया गया है।
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फिजिशियन के रिटायरमेंट से बढ़ेगी परेशानी
जिला अस्पताल में तैनात फिजिशियन डॉ. संजीव कुमार टंडन दिसंबर में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इसके बाद मरीजों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। अस्पताल में सर्वाधिक मरीजों की ओपीडी फिजिशियन की होती है। वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. चंदन मिश्रा ने बताया कि 12 वर्षों बाद वर्ष 2017 में डॉ. संजीव कुमार टंडन की अस्पताल में तैनाती हुई थी। इससे पूर्व फिजिशियन नहीं होने से मरीज निजी क्लीनिकों में जाते थे। 2017 के बाद से फिजिशियन डॉ. टंडन मरीजों को देखते आ रहे हैं। उनकी ओपीडी में रोजाना 150 से 200 मरीज आते हैं।
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