मनसा देवी हिल बाईपास के किनारे अवैध कब्जे और आरटीआई से सूचना न मिलने का प्रकरण लगातार गहराता जा रहा है। मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने अब लोक सूचना अधिकारी सिडकुल को आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए एसएसपी हरिद्वार को निर्देशित किया है।
इससे पहले रतूड़ी ने एचआरडीए के तत्कालीन अधिशासी अभियंता को पेश करने के लिए कहा था। यह मामला न केवल आयोग को असहज कर रहा है बल्कि अपीलकर्ता भी कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता अजीत सिंह चौहान ने वर्ष 2023 में हिल बाईपास के किनारे कब्जों से संबंधित सूचना मांगी थी जो वर्ष 2025 तक नहीं मिली। पहले विभाग एक-दूसरे का मालिकाना हक बताते रहे। अब सिडकुल प्रशासन ने स्वीकार किया है कि भूमि उसके स्वामित्व में है लेकिन अब वह वर्ष 2007 में दायर वाद का हवाला दे रहा है।
चौहान का कहना है कि सिडकुल प्रशासन द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार इस पूरे मामले में सर्वाधिक गलतियां रजिस्ट्रार की बताई जा रही हैं। सवाल यह है कि जब राज्य गठन के बाद से ही भूमि का मालिकाना हक सिडकुल को मिल गया था तो इसे संरक्षित क्यों नहीं किया गया। अब अपीलकर्ता इस पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं। यही नहीं मुख्य सूचना आयुक्त भी अपने आदेशों का अनुपालन न होने की दशा में लाचार हैं।
अगर 2007 से चल रहा मुकदमा तो किसने की रजिस्ट्री
मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी के सामने आए प्रकरण में उन्होंने भले ही एसएसपी को लोक सूचना अधिकारी सिडकुल को पेश करने के निर्देश दे दिए लेकिन इसमें अहम सवाल यह है कि आखिरकार उच्च न्यायालय में दर्ज वाद को अनदेखा करते हुए रजिस्ट्री कैसे की गई। चौहान का कहना है कि जब सिडकुल प्रशासन को राज्य गठन के बाद से ही भूमि का मालिकाना हक मिला तो उस समय से अब तक इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने सवाल उठाया है कि रजिस्ट्री किसने की इसका उल्लेख नहीं है। रजिस्ट्री किसके नाम हुई इसका उल्लेख एसडीएम हरिद्वार के रिपोर्ट में है।
एक ही व्यक्ति ने बेची सिडकुल की भूमि
इस प्रकरण में मुख्य सूचना आयुक्त ने कई विभागों पर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। अपीलकर्ता को 12 कब्जे रिपोर्टों के बदले केवल नौ रजिस्ट्री के अभिलेख मिले हैं। इन नौ रजिस्ट्रियों में क्रेता (खरीदने वाले) तो नौ अलग-अलग लोग हैं लेकिन विक्रेता (बेचने वाला) केवल एक व्यक्ति नरेश धीमान है जिसका निवास स्थान भी प्रमाणित नहीं है। यानी एक ही व्यक्ति ने सिडकुल की भूमि बेच दी। तहसील प्रशासन शेष तीन पहुंच वाले खरीदारों के प्रमाण देने में भी असमर्थ है।