उत्तर भारत में रविवार को मां संकटा भवानी की आराधना से जुड़ा सकट पर्व मनाया जाएगा। इस दिन माएं अपनी संतानों के लिए व्रत रखेंगी और संकटा देवी की पूजा करेंगी। इसी दिन शिव ने अपने पुत्र गणेश का सिर काटा था तथा मां पार्वती के व्रत के बाद उन्हेें गजानन बना दिया था।
सकट का पर्व संतान के प्रति मां के प्रेम का प्रतीक है। इस पर्व से जुड़ी अनेक लोककथाएं भी विद्यमान हैं। प्राच्य विद्या सोसायटी के अध्यक्ष डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार माघ मास की चतुर्थी को संकटा चतुर्थी कहा जाता है। इसी दिन यह जाने बगैर कि गणेश पार्वती के मानस पुत्र हैं, शिव ने अपने त्रिशूल से गणेश का सिर काट दिया था। बाद में जब पार्वती को यह पता चला कि उनके आदेश का पालन करते हुए गणेश ने शिव को उनके महल में प्रवेश नहीं करने दिया, तब उन्होंने शिव से पुत्र को जीवित करने की मांग की। शिव की चुप्पी पर पार्वती ने मां संकटा भवानी की पूजा अर्चना की तथा दिन भर व्रत रखा। संकटा भवानी के आशीर्वाद से भगवान शिव ने हाथी का मस्तक गणेश के धड़ पर जोड़कर उन्हें गजानन बना दिया। इस दिन मां पार्वती की पूजा भी विभिन्न शिव मंदिरों में की जाएगी। घरों में व्रती महिलाएं एकत्रित होकर मां संकटा भवानी की पूजा करेंगी।
सांयकाल चंद्रदर्शन के बाद व्रत खोले जाएंगे। पंचपुरी में सकट का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। घरों में सफेद तिल और बूरा मिलाकर तिलकुट तैयार करने की परंपरा है। तिलकुट का भोग अन्य पकवानों के साथ अग्नि देवता को भी लगाया जाता है।