शारदा एवं ज्योर्ति पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि यदि अच्युतानंद ने फर्जी पट्टाभिषेक कराया तो वे उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाएंगे। उन्होंने कहा कि अगले ही दिन अच्युतानंद के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसा करना शंकराचार्य परंपरा के विपरीत और आपराधिक कृत्य है। उन्हें ऐसा दुस्साहस नहीं करना चाहिए।
जबलपुर से दूरभाष पर जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि पश्चिमानाय द्वारिकाधीश मंदिर के बाहर संगमरमर का चबूतरा है। शारदा पीठ का शंकराचार्य तभी बनता है, जब अभिषेक उस चबूतरे पर बैठकर हो। बनने वाले शंकराचार्य को कई दिनों तक विद्वानों से शास्त्रार्थ कर सभी प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। जहां तक अच्युतानंद का सवाल है, उन्हें ढंग से हनुमान चालीसा भी याद नहीं है। भूमा नाम की कोई पीठ संतों के इतिहास में नहीं है। जिस आश्रम में वे रहते हैं, उसकी स्थापना दंडी स्वामी भूमानंद ने की थी। साधारण आश्रम को पीठ बताना बेईमानी है। किसी परिषद को उन्हें इस पद पर स्थापित करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार केवल शारदा पीठाधीश्वर के रूप में मेरे पास है। संसार से विदा लेने से पूर्व मैं स्वयं वेदनिष्ट ब्राह्मण को किसी पद पर आसीन करूंगा। यही आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य ने शंकर मठामनाय में व्यवस्था दी है।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि यह कहना गलत है कि दशनाम सन्यासियों में से तीर्थ या आश्रम उपनाम वाला संत ही द्वारिका का शंकराचार्य बन सकता है। द्वारिका में शंकराचार्यों की लंबी परंपरा है और सरस्वती उपनाम वाले अनेक जगद्गुरु इस पर आसीन हुए हैं। पुरी में निश्चलानंद सरस्वती विराजमान हैं। जबकि तीर्थ उपनाम वाले स्वामी भारती तीर्थ श्रृंगेरी के शंकराचार्य हैं। काशी विद्वत परिषद ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी अन्य परिषद किसी व्यक्ति को शंकराचार्य नहीं बना सकती। शारदा पीठ रजिस्टर्ड संस्था है। जिसके वे एक मात्र सोल ट्रस्टी हैं। अच्युतानंद ने यदि मनमानी की तो उन्हें न्यायालय और थाने का मुख देखना पड़ेगा।
काशी विद्वत परिषद से कोई अनुमति नहीं
काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष पंडित रामयत्न शुक्ल व महामंत्री शिवजी उपाध्याय ने बताया कि अच्युतानंद को विद्वत परिषद ने शंकराचार्य बनने की कोई अनुमति प्रदान नहीं की है। यह ठीक है कि उन्होंने परिषद को निमंत्रण दिया था। उन्हें बता दिया गया था कि ऐसा कोई व्यक्ति शंकराचार्य पद पर आसीन नहीं हो सकता, जो गुरु परंपरा से न आए। शास्त्रार्थ का सामना किए बगैर किसी को भी शंकराचार्य नहीं बनाया जा सकता। अध्यक्ष ने बताया कि इस पद पर विधि सम्मत स्वरूपानंद सरस्वती ही एकमात्र शंकराचार्य के रूप में आसीन हैं।
फर्जी आयोजन से दूर रहें अथवा दंड झेलें
शारदा पीठ शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रवक्ता स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि साधु सन्यासियों को अच्युतानंद के आयोजन से अलग रहना चाहिए। अखाड़ा परिषद पहले ही ऐसे संतों के बहिष्कार की घोषणा कर चुकी है। जो साधु आयोजन में जाएगा, उसे विधान का दंड भुगतना पड़ेगा। अच्युतानंद यदि विद्वान हैं तो वह पहले विद्वत परिषद के सामने आएं और शास्त्रार्थ करें।
अच्युतानंद का पटभिषेक आज
भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ का अभिषेक समारोह शुक्रवार को हरिपुर कलां के अद्भुत मंदिर में होगा। इस आयोजन में देशभर से संत भाग ले रहे हैं। प्रात: 10 से 12 बजे तक पूजा पाठ व अभिषेक की परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। सांय पांच से सात बजे तक विद्वानों की सभा और शास्त्र चर्चा चलेगी। रात्रि नौ बजे से अगले दिन प्रात: पांच बजे तक दिव्य पदार्थों से भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा। 25 फरवरी को शंकराचार्य पद पर आसीन हो चुके अच्युतानंद तीर्थ का नागरिक अभिनंदन अद्भुत मंदिर में किया जाएगा।