रुड़की। सात साल पहले एक शिक्षक की आकस्मिक मौत के बीमे का पैसा आश्रितों को अब जाकर मिला है। शिक्षा विभाग की ओर से दो दिन पहले उपलब्ध कराए गए चैक को आश्रित की बेटी ने बैंक में जमा करवा दिया है।
डीएवी इंटर कालेज रुड़की के शिक्षक प्रकाश चंद्र सिंघल की वर्ष-2009 में आकस्मिक मौत हो गई थी। उनका सामूहिक बीमा का करीब एक लाख छह हजार रुपये भारतीय जीवन बीमा निगम ने शिक्षा विभाग को दे भी दिया था। लेकिन शिक्षा विभाग इस पैसे को दबाकर बैठा हुआ है। इसकी जानकारी उन्हें सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना में बीमा निगम की ओर से दी भी गई थी। जब आश्रितों ने मुख्य शिक्षा अधिकारी स्थित लेखा विभाग से जानकारी मांगी तो उन्होंने चैक शिक्षक के आश्रितों को दे दिया जाना बताया। जबकि उन्हें चैक नहीं मिला था। कुछ दिन बाद कहा गया कि चैक कहीं गुम हो गया है। लेकिन विभाग की ओर से चैक गुमशुदगी की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। आश्रितों ने फिर शिक्षा विभाग से सूचना मांगी तो कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। प्रथम अपीलीय अधिकारी को अपील करना भी बेकार गया। कुछ दिन पहले इस मुददे को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। जिसके चलते शुक्रवार को मुख्य शिक्षा अधिकारी के लेखा विभाग का कर्मचारी शिक्षक की आश्रित बेटी नेहा सिंघल के घर चैक लेकर पहुंचा। नेहा ने बताया कि उसी दिन चैक बैंक में जमा कर दिया था। लेकिन अभी तक चैक कैश नहीं हो पाया है।
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दो साल का ब्याज कौन देगा!
निगम ने दो साल पहले बीमा का पैसा जारी कर दिया था। लेकिन शिक्षा विभाग के लेखा कर्मचारी पैसा दबाए बैठे थे। आश्रित बार-बार मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रहे थे। अब चैक मिला तो लेकिन दो साल देर से मिले चैक का ब्याज कौन देगा। शिक्षक की बेटी नेहा का कहना है कि केवल मूल धन का चैक दिया गया है उसका ब्याज उन्हें कौन देगा। यह स्पष्ट नहीं है।
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आयोग में करेंगे खिंचाई
सूचना ने देने के चलते शिक्षक के आश्रितों ने उत्तराखंड सूचना आयोग में दूसरी अपील दाखिल कर दी थी। अगले महीने की 10 तारीख को आयोग इस मामले की सुनवाई करेगा। आश्रितों का कहना है चैक को दबाए रखने और झूठ बोलकर उन्हें गुमराह करने की बात भी आयुक्त के सामने रखेंगे।
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शिक्षक संघ ने जताई नाराजगी
माध्यमिक शिक्षक संघ की ओर से इस मामले को कई बार अधिकारियों के सामने उठाया गया था। लेकिन फिर भी शिक्षक के आश्रितों को बीमा का पैसा नहीं मिला। जिलाध्यक्ष डा. अनिल सैनी और महामंत्री राजेश सैनी का कहना है विभागीय कर्मचारी बेवजह लोगों को परेशान करते हैं। उच्च अधिकारियों को उन पर नकेल कसनी चाहिए।