राज्यपाल डा. कृष्णकांत पॉल ने कहा कि भारतीय सभ्यता और सैद्धांतिक मूल्यों की गरिमा कायम रखने के लिए युवा पीढ़ी को संस्कृत और संस्कृति से जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि संस्कृत से आज रोजगार के तमाम अवसर भी खुल रहे हैं। राज्यपाल शनिवार को उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में दो शैक्षिक सत्रों के 40 छात्र छात्राओं को गोल्ड मेडल दिए गए। जबकि दो विद्वानों को डीलिट की मानद उपाधि प्रदान की गई।
राज्यपाल डा. केके पॉल ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा ही नहीं बल्कि ऐसी कुंजी है जो विरासत में प्राप्त हुए धर्म, संस्कृति व ज्ञान विज्ञान के गूढ़ रहस्यों को खोलने में मदद करती है। महामहिम ने कहा कि संस्कृत का ज्ञान लेकर छात्र बीएड, नेट, जेआरएफ, आचार्य और पीएचडी जैसी उपाधियां हासिल कर समाज को दिशा दे सकता है। संस्कृत पूजा पाठ के अलावा ज्योतिष, योग आदि क्षेत्रों से जीविकोपार्जन का माध्यम भी बन रही है।
विशिष्ठ अतिथि राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि केवल डिग्री लेने से कोई शिक्षित नहीं हो जाता, बल्कि जीवन में चरित्रगत गुणों का विकास करना ही सच्ची शिक्षा है। कुलपति प्रो. पीयूषकांत दीक्षित ने स्वागत भाषण पढ़ते हुए कहा कि संस्कृत वैज्ञानिक भाषा है। उन्होंने कहा कि अनेक वैज्ञानिक तत्व संस्कृत में निहित हैं। कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने अतिथियों का स्वागत किया। समारोह में अलग अलग विषयों के 40 टॉपरों को गोल्ड मेडल राज्यपाल के हाथों दिए गए। वहीं नासा के पूर्व वैज्ञानिक डा. ओमप्रकाश पांडेय और सांची बौद्ध विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश की पूर्व कुलपति डा. शशिप्रभा कुमार को डीलिट की मानद उपाधि से नवाजा गया। समारोह में डिग्री लेने वाले संस्कृत छात्र-छात्राएं और उनके परिजन मौजूद रहे।