... तो 40 वर्ष पुराने रोपवे की राह में अभी और भी कई रोड़े
रोपवे संचालन को लेकर हर कदम पर कई रोड़े हैं। पहले हाईकोर्ट के एक आदेश के तहत 31 जनवरी को एक्सटेंशन की अवधि को अंतिम बताकर संचालन पर रोक लगी।
संचालन कर रही फर्म ऊषा ब्रेको ने किराया बढ़ाकर देने के एवज में एक्सटेंशन मांगा और नगर निगम जन सुविधा का हवाला देकर हाईकोर्ट पहुंचा। इस पर हाईकोर्ट ने सशर्त तीन माह का एक्सटेंशन दे दिया। अब बाधा 40 वर्ष पुराने रोपवे के संचालन को लेकर है। नगर निगम की ओर से रोपवे संचालन को लेकर कंसल्टेंट फर्म का चयन करना है। इसके लिए टेंडर नोटिस भी जारी कर दिया गया है। 31 जनवरी तक कंसल्टेंट फर्म के मसौदे के आधार पर उसका चयन किया जाएगा।
कई बिंदुओं पर नगर निगम को पूछना है सवाल
नगर निगम की ओर से इच्छुक फर्म के समक्ष चुनौती और शर्त भी रखी जाएगी। इसके लिए 31 जनवरी से पहले आवेदक फर्म के साथ बैठक करनी होगी। इसमें बताया जाएगा कि रोपवे 40 वर्ष पुराना है। इसमें यह सवाल उठेंगे कि संचालन से पूर्व इसके पुनर्निमाण की आवश्यकता है या नहीं, रोपवे के आधुनिक तकनीकी से फर्म किस तरह जोड़ेंगे और उसे विकसित करने की योजना क्या है। नई तकनीकी का आधार यह होगा कि पर्यटकों की आवक को देखते हुए क्षमता बढ़ाने के संबंध में उनका क्या प्लान है। वर्तमान में एक ट्रॉली में चार लोग ही जा सकते हैं। -
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पहाड़ी का भी रखना होगा ध्यान
हिमाचल के नैना देवी में हुए पूर्व में हादसे को देखते हुए यह भी ध्यान रखना होगा कि मंदिर में अधिक भीड़ ना जाए। यदि नए टेंडर में संचालन करने वाली फर्म नई तकनीकी के रोपवे का निर्माण करती है तो मंदिर और उसके परिसर में भीड़ की आवक इस तरह न हो कि वहां हादसे का खतरा बने। दूसरी तरफ मनसा देवी पहाड़ी के भूस्खलन जोन में होने और ट्रीटमेंट के प्लान को भी संचालन करने वाली फर्म को समझना ही नहीं समन्वय बनाकर कार्य करना होगा।