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अखाड़ों और आश्रमों ने किया बहिष्कार

Sat, 25 Feb 2017 12:03 AM IST
hridwar uttrakhanda india
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स्वामी अच्युतानंद के अभिषेक समारोह में किसी अखाड़े और आश्रम में से कोई साधु संन्यासी व महामंडलेश्वर नहीं पहुंचा। हरिद्वार के संतों ने पूरी तरह समारोह का बहिष्कार किया। हरिद्वार के किसी नेता, अधिकारी और आम आदमी भी समारोह में शामिल नहीं हुआ। समारोह स्थल पर अधिकतर कुर्सियां खाली पड़ी रही।       
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और द्वारिका के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती आयोजन को अवैध घोषित कर चुके हैं। अखाड़ा परिषद ने चेतावनी दी थी कि यदि कोई भी संत इस आयोजन में जाएगा तो उसे संत समाज से बहिष्कृत कर दिया जाएगा। अखाड़े ने कहा था कि यदि किसी कार्यक्रम में ऐसा संत आमंत्रित किया गया तो उस आयोजन में भी साधु-समाज भाग नहीं लेगा। इस घोषणा का असर आयोजन में दिखाई दिया। यहां तक कि भूमा पीठ से सटे कई आश्रमों के संतों ने भी कार्यक्रम में भाग नहीं लिया। स्वामी अच्युतानंद ने दंडी बाड़े के दंडी साधुओं को बुलाकर भीड़ जुटाई। काशी से आए पांच संत ही भगवा वेश में नजर आए। जहां तक काशी विद्वत परिषद की बात है, काशी में करीब दो दर्जन विद्वत परिषद चल रही हैं। इस आयोजन में काशी पंडित सभा के विद्वान पंडितों ने भाग लिया। ये सभी पंडित संस्कृत भाषा में वार्तालाप कर रहे थे।     
इनसेट  
तीन वर्षों में गद्दी छोड़ें तीनों शंकराचार्य      
हरिद्वार। अद्भुत मंदिर के मंच से स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती सहित काशी के सभी संतों और पंडितों ने कहा कि श्रृंगेरी, गोवर्धन और ज्योर्ति पीठ पर विराजमान भारती तीर्थ, निश्चलानंद सरस्वती व स्वरूपानंद सरस्वती अनाधिकृत रूप से बैठे हुए हैं। उन्हें अपने पद तीन वर्ष में छोड़ देने चाहिए। ऐसा न होने पर विद्वानों की परिषद तीनों पीठों पर नए शंकराचार्यों के नामों की घोषणा कर देगी। विद्वानों ने कहा कि स्वरूपानंद दो पीठों पर बैठे हुए हैं। जबकि किसी भी शंकराचार्य को दो पीठ पर बैठने का अधिकार नहीं है।
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