कुख्यात सुनील राठी दस दिन से हरिद्वार जेल में है लेकिन, हरिद्वार पुलिस इससे पूरी तरह अनभिज्ञ है। हरिद्वार पुलिस जेल के अंदर तो दूर अभी तक इर्द-गिर्द तक नहीं फटकी है। लापरवाही का आलम यह तब है जब उसका चेला प्रवीण वाल्मीकि रुड़की में दहशत फैला रहा है।
पिछले 15 साल से कुख्यात सुनील राठी हरिद्वार के अपराध जगत में इकलौता नाम है। डिप्टी जेलर नरेंद्र खंपा हत्याकांड से उसका नाम जैसे आसमान छू गया हो। वैसे कई हत्याकांड को राठी के इशारे पर अंजाम देने का खुलासा खुद हरिद्वार पुलिस गाहे-बगाहे करती आई है। वह जेल में मोबाइल इस्तेमाल करता है। यह दावा खुद पुलिस कर चुकी है। वह रुड़की जेल में बैठकर फेसबुक भी चलाता रहा है। अब राठी दस दिन से हरिद्वार जेल में कैद है। लिहाजा हरिद्वार पुलिस को चौकन्ना रहने की आवश्यकता है। क्योंकि हर वारदात के बाद पुलिस की हालत सांप निकलने के बाद लकीर पीटने जैसी होती है। पुलिस बिल्कुल अंजान बनी बैठी है। हरिद्वार पुलिस के किसी अफसर ने जेल की तरफ फटकना आवश्यक नहीं समझा। राठी से मिलने कौन-कौन आ रहा है। ये जानना भी जरूरी है लेकिन, ऐसा भी नहीं हो रहा है। कुख्यात जेल में बैठे-बैठे मोबाइल से अपना नेटवर्क चलाता रहा है। आईजी संजय गुंज्याल ने कहा कि राठी पर निगाह रखने के लिए हरिद्वार पुलिस को निर्देश दिए जाएंगे। राठी को लेकर सतर्क रहना जरूरी है।
प्रवीण ने सुनील की सरपरस्ती
में सीखा अपराध का ककहरा
कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि अपने अपराध जगत के गुरु सुनील राठी की राह पर चल निकला है। ठीक राठी की तरह ही वह अपने आतंक का नेटवर्क फैलाता जा रहा है। फिलवक्त रुड़की में उसके नाम की दहशत कारोबारियों के जेहन में घर करती जा रही है।
कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि का आपराधिक कैरियर लंबा नहीं है। रुड़की के कैप्टन विनय भाटिया हत्याकांड से वह सुर्खियों में आया था। फिर कारोबारी नवीन जिंदल हत्याकांड और डिप्टी जेलर नरेंद्र खंपा हत्याकांड से उसका नाम उछला लेकिन, रुड़की के सफाई नायक बसंत हत्याकांड से प्रवीण वाल्मीकि के नाम की दहशत बढ़ती जा रही है। भले ही उसने सफाई नायक का कत्ल रंजिश के चलते कराया हो लेकिन, अब रुड़की के अपराध जगत में उसका नाम छाया हुआ है। अब कुख्यात के नाम का इस्तेमाल कर रुड़की के कारोबारी से चौथ मांगी जा रही है। ताजातरीन मामले से प्रवीण वाल्मीकि के दुस्साहस की पराकाष्ठा साफ दिखाई दी है। वह जेलर तक के मोबाइल फोन से चौथ की डिमांड कर रहा है। यदि प्रवीण वाल्मीकि पर शिकंजा नहीं कसा जाता है तो जिले के लिए नासूर बने राठी सरीखा दूसरा नाम प्रवीण वाल्मीकि का होगा।