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आबादी बढ़ी, पेयजल आपूर्ति संसाधन नहीं

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गंगा तट पर बसे हरिद्वार में आबादी बढ़ने के साथ पीने के पानी के संसाधनों में कोई इजाफा नहीं हुआ। यही कारण है कि गर्मियों में लोगों के हलक तर नहीं हो रहे। जल संस्थान बढ़ती आबादी को पानी पिलाने में सक्षम नहीं है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों की बड़ी आबादी बोरिंग पर निर्भर है। अत्यधिक पानी का दोहन होने से भूमिगत जलस्तर हर साल गिर रहा है। जलस्तर गिरने से ग्रामीण इलाकों में कई हैंडपंप सूख गए हैं। जबकि निजी घरों में लगी बोरिंग को री-बोर कर गहराई बढ़ाई जा रही है। शहर में बिजली गुल होने पर पानी की वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए भी पर्याप्त मात्रा में जल संस्थान के पास संसाधन नहीं है। जिससे इस स्थिति में पानी की किल्लत से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
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शहर की आबादी लगभग पांच लाख तक पहुंच गई है। लेकिन पूरी आबादी के गले पानी से तर करने के लिए पेयजल संसाधन नहीं बढ़ पा रहे हैं। जिलेभर में 90 पंपिंग स्टेशन और 50 से ज्यादा ओवरहेड टैंक हैं। हरिद्वार शहर में लगभग 30 पंपिंग स्टेशन हैं। इन दिनों शहर में प्रतिदिन 100 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) पानी की आपूर्ति हो रही है। जबकि मार्च में 102 एमएलडी थी। गर्मी बढ़ने के बाद पानी की आपूर्ति घट रही है। इसके साथ ही संसाधन भी कम पड़ रहे हैं। 90 पंपिंग स्टेशनों के लिए केवल 16 जनरेटर हैं। ये जनरेटर भी केवल शहर में ही लगे हैं। जबकि अन्य क्षेत्रों में बिजली गुल होने की स्थिति में पानी की आपूर्ति ठप ही रहती है। टैंकर भी केवल चार ही हैं। जिसमें दो बड़े और दो छोटे टैंकर हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सूख रहे हैंडपंप
जिलेभर में 23517 हैंडपंप लगे हुए हैं। जिनमें से गर्मी के कारण जल स्तर घटने से पांच फीसदी हैंडपंप सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं।
कम हो रहा पानी का प्रेशर
शहर में कुछ साल पहले तक पानी का प्रेशर बहुत अच्छा था, लेकिन, आज स्थिति ये है कि पानी का प्रेशर बेहद कम हो गया है। बिना मोटर के पहली मंजिल पर भी पानी नहीं चढ़ पाता है। जबकि कई इलाकों में तो सुबह के बाद शाम को ही पानी की कुछ घंटे आपूर्ति होती है।
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शहर में पानी की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में हो रही है। बिजली रोस्टिंग की वजह से पंपिंग स्टेशन बंद होने से समस्या खड़ी होती है। देहात क्षेत्रों में जल जीवन मिशन योजना के अंतर्गत ओवरहेड टैंक, ट्यूबवेल निर्माण और नई पेयजल लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है।
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- मदन सेन, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान हरिद्वार
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