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तीन हजार हजार मृतक भी ले रहे थे वृद्धा पेंशन

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कोरोनाकाल में दो साल तक वृद्धावस्था पेंशन के लाभार्थियों का सत्यापन नहीं होने के कारण 2798 लोगों की मौत होने के बाद भी पेंशन खातों में जाती रही। समाज कल्याण विभाग ने सत्यापन शुरू किया तो इस बात का खुलासा हुआ। अब विभाग खातों में जमा धनराशि को वापस लेने के लिए प्रक्रिया शुरू कर रहा है।
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समाज कल्याण विभाग की ओर से जनपद में लगभग 87 हजार बुजुर्गों को वृद्घा पेंशन दी जा रही है। अप्रैल में प्रदेश सरकार ने पेंशन 1200 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रति माह कर दी थी। पेंशन की त्रैमासिक किस्त के हिसाब से जारी की जाती है। वैसे विभाग हर साल लाभार्थियों का सत्यापन करता है।
लेकिन दो साल कोरोना संक्रमण के कारण सत्यापन नहीं हो सका। इसके मद्देनजर चालू वित्तीय वर्ष अप्रैल, मई, जून की त्रैमासिक किस्त डालने से पहले वृद्घा पेंशनरों का सत्यापन अभियान चलाया गया। जनपदभर में करीब एक माह तक चले सत्यापन अभियान में वृद्घा पेंशन के 2798 लाभार्थी मृतक पाए गए हैं। किसी को दो साल से तो किसी के खाते में एक साल और छह माह से पेंशन की राशि ट्रांसफर की जा रही थी। संवाद
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14 विधवा भी मिली मृतक
जिला प्रबोशन विभाग की ओर से भी करीब 26 हजार विधवा महिलाओं को पेंशन राशि दी जाती है। सत्यापन के दौरान 14 ऐसी विधवा महिलाएं मिली हैं। जिनकी मौत होने के बाद भी उनके खातों में सहायता राशि जा रही थी।
शहरी क्षेत्रों का सत्यापन अभी शेष
समाज कल्याण विभाग की ओर से अभी केवल बहादराबाद, भगवानपुर, रुड़की, लक्सर, नारसन, खानपुर ब्लॉक क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों का ही सत्यापन किया है। शहरी क्षेत्रों के वृद्घा पेंशनरों का सत्यापन होना अभी शेष है। शहरी क्षेत्रों का सत्यापन होने के बाद भी सैकड़ों मृतक पेंशन सामने आ सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों की पेंशनों का सत्यापन कर लिया गया है। जो लोग मर चुके हैं, उनकी पेंशन रोक दी गई है। मृतकों के खातों से पेंशन राशि की रिकवरी करने के लिए संबंधित बैंकों को पत्र जारी किए जाएंगे।
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