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निजी अस्पतालों की ओपीडी लगे रहे ताले, सरकारी अस्पतालों में मिला इलाज

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महिला अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़ । - फोटो : HARIDWAR
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आयुर्वेदिक चिकित्सकों को भी सर्जरी की अनुमति देने के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अह्वान पर शहर के सभी प्राइवेट चिकित्सकों ने अपने निजी अस्पताल और क्लीनिक बंद रखे। ओपीडी बंद रहने से मरीज और उनके तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि गंभीर मरीजों के लिए सभी अस्पतालों की इमरजेंसी खुली रही है। निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद रहने का असर यह रहा कि जिला और महिला अस्पताल में मरीजों लंबी लाइन लग गई। सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों ने ओपीडी के निर्धारित समय के बाद भी मरीजों की जांच की।
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हरिद्वार के 70 निजी अस्पतालों और क्लीनिकों के ओपीडी कक्षों में शुक्रवार को ताले लटके रहे। सुबह कई मरीज इलाज के निजी क्लीनिकों और अस्पतालों में पहुंचे। लेेकिन कर्मचारियों ने मरीजों को बताया कि चिकित्सक आज ओपीडी में नहीं बैठेंगे। इसके बाद मरीज निराश होकर घर लौट गए। वहीं हरमिलाप जिला अस्पताल की पंजीकरण खिड़की पर सुबह ही मरीजों की लाइन लगनी शुरु हो गई। ओपीडी में 231 मरीजों ने पर्चा बनवाया। वहीं 60 पुराने मरीज चिकित्सकों को दोबारा दिखाने और दवा के लिए अस्पताल पहुंचे थे। सबसे अधिक सर्दी, जुकाम, खांसी और बुखार के मरीज फ्लू ओपीडी में दिखाने के लिए अस्पताल आए थे।
जांच कराने पहुंचे मरीजों को हुई परेशनी
शहर के कई पैथोलॉजी और अधिकांश डाइग्नोस्टिक सेंटर में भी मरीजों की जांच नहीं की गई। हालांकि यहां भी इमरजेंसी में आए मरीजों की जांच की सुविधा दी गई। लेकिन सामान्य मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई मरीजों ने जिला अस्पताल और मेला अस्पताल खून जांच, एक्सरे और अल्ट्रासाउंड कराए।
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आम दिनों के मुकाबले ओपीडी में मरीजों की संख्या अधिक रही। 291 मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। सभी मरीजों को इलाज मिला।
- डॉ. चंदन मिश्रा, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्पताल, हरिद्वार
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