नगर निगम का कर एवं राजस्व अनुभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। इससे कार्य में बाधा खड़ी हो रही है। 15 टीसी (टैक्स कलेक्टर) की जगह केवल दो ही टीसी के भरोसे टैक्स वसूली और नोटिस देने का काम चल रहा है। इससे कार्य अधर में लटक रहे हैं और निगम राजस्व वसूली में पिछड़ रहा है।
नगर निगम की झोली भरने में सबसे अधिक गृहकर का योगदान होता है। निगम क्षेत्र में करीब 34 हजार करदाता हैं। इनमें 28 हजार आवासीय और छह हजार व्यावसायिक करदाता हैं। टैक्स से निगम को सालाना करीब सात से आठ करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है।
कर अनुभाग के टीसी टैक्स वसूलने से लेकर बकायेदारों को नोटिस देने का कार्य करते हैं लेकिन अनुभाग टीसी की कमी से जूझ रहा है। 15 की जगह केवल दो ही टीसी के ऊपर पूरी जिम्मेदारी है। इससे टैक्स वसूली में पिछड़ने के साथ ही नोटिस देने और चालान कर जुर्माना वसूलने जैसे काम ठप पड़े हैं। अधिकारियों के अनुसार टैक्स की राशि से मामला जुड़ा होने से टीसी की जिम्मेदारी स्थायी कर्मचारी को ही दी जाती है लेकिन कर्मचारियों की मांग को लेकर अधिकारियों ने आज तक कोई कदम नहीं उठाया।
लंबे समय बाद बढ़ी टीआई की संख्या
कर अनुभाग में तीन टैक्स इंस्पेक्टरों की तैनाती थी। एक साल पहले दो टैक्स इंस्पेक्टरों का ट्रांसफर होने के बाद एक ही व्यवस्था संभाल रहे थे। कुछ दिन पहले ही दो क्लर्क को पदोन्नत किया गया, जिसके बाद उन्हें टैक्स इंस्पेक्टरों की जिम्मेदारी दी गई।
संबंधित अधिकारियों से पूरी जानकारी लेने के बाद कर्मचारियों की मांग शासन को भेजी जाएगी। साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश अधिकारियों को दिए जाएंगे। -अनीता शर्मा, मेयर हरिद्वार