- हरिद्वार में करोड़ों रुपये की भूमि पर कब्जे का मामला
- 19 महीने की देरी से सूचना देने पर लग चुका है जुर्माना
- आदेश का पालन नहीं होने पर आयोग सख्त
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग ने हरिद्वार में करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में लोक सूचना अधिकारी, उपजिलाधिकारी सदर हरिद्वार और सिडकुल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस आयोग के पिछले आदेश का पालन नहीं होने की शिकायत के बाद दिया गया है। यह मामला हरिद्वार हिल इंडस्ट्रियल एरिया बाईपास मार्ग पर स्थित सरकारी भूमि से जुड़ा है।
बता दें कि उत्तराखंड राज्य के गठन से पहले यह भूमि यूपीएसआईडीसी की थी, जिसे बाद में सिडकुल हरिद्वार को स्थानांतरित किया गया था। वर्तमान में इस भूमि पर सिडकुल का स्वामित्व है, लेकिन भू-माफिया ने इस पर अवैध कब्जा कर लिया है। फर्जी दस्तावेज के आधार पर हरिद्वार विकास प्राधिकरण से एक कॉलोनी स्वीकृत करा ली थी, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया।
इस भूमि पर अभी भी करीब एक दर्जन से अधिक लोग अवैध रूप से काबिज हैं। आरटीआई क्लब उत्तराखंड के सदस्य अजीत सिंह चौहान ने आरटीआई आवेदन और दो साल की पैरवी के बाद इस प्रकरण का खुलासा किया था। मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने 23 जनवरी, 2026 को इस भूमि की पैमाइश के आदेश दिए थे। आयोग ने हरिद्वार विकास प्राधिकरण को अजीत सिंह चौहान को 19 महीने की देरी से सूचना देने के लिए 10,000 रुपये की क्षतिपूर्ति देने का भी आदेश दिया था।
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आदेश का अनुपालन नहीं होने पर की शिकायत
अजीत सिंह चौहान ने शिकायत की है कि 23 जनवरी, 2026 के आदेश का अनुपालन अभी तक नहीं हुआ है। इस आदेश में भूमि का सीमांकन और सूचनाओं का अवलोकन कराना शामिल था। आयोग ने इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए संबंधित पक्षकारों और जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। आयोग ने अपने आदेश में सचिव, हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण, उप जिलाधिकारी सदर हरिद्वार और लोक सूचना अधिकारी सिडकुल हरिद्वार को 10 फरवरी, 2026 को की गई अपील के संबंध में सभी सूचनाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।