हरिद्वार। शांतिकुंज के संस्थापक आचार्य श्रीराम शर्मा के जन्मशताब्दी महोत्सव के दौरान यज्ञशाला में मची भगदड़ में 21 बेगुनाहों की मौत का मामला प्रदेश सरकार ने वापस ले लिया है। मंगलवार को जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ ने मुकदमा वापस लेने संबंधी आदेश मिलने की पुष्टि की है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या कोई इन मौतों का गुनाहगार नहीं है।
नवंबर 2011 में शांतिकुंज के संस्थापक पंडित आचार्य श्रीराम शर्मा के जन्म शताब्दी महोत्सव का आयोजन रोड़ीबेलवाला, लालजीवाला क्षेत्र में किया गया था। सात नवंबर से कार्यक्रम की भव्य तरीके से शुरुआत हुई थी। लेकिन अगले ही दिन आठ नवंबर को लालजीवाला में बनी यज्ञशाला में भगदड़ मच गई थी। इस भयावह हादसे में 21 लोगों की जानें चली गई थी। उस वक्त कोतवाल रहे जयमल सिंह नेगी की ओर से अज्ञात के खिलाफ प्रभावी धाराओं में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। धीरे-धीरे वक्त गुजरता गया जांच चलती रही। जांच अधिकारी तो कई बदले गए लेकिन पुलिस ने इतनी बड़ी घटना में किसी की गिरफ्तारी नहीं की। घटना की विवेचना कर रहे कई विवेचक बदले गए। आखिरकार 13 मई-2014 को शांतिकुंज के केकेपी शर्मा (निवासी बंसी अखल, सोनभद्र, बिहार), गौरीशंकर शर्मा (पुत्र सीताराम निवासी शांतिकुंज), हितेंद्र (पुत्र नरेंद्र निवासी सोही बुलंदशहर) और राम कराह (पुत्र शोभानाथ, निवासी हटवा, जिला रीवा, मध्यप्रदेश) के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभी तक यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। पुलिस की चाल तो सुस्त रही। लेकिन मामले का रफा-दफा कराने के प्रयास भी तेजी से चलते रहे। अब प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने इतनी बड़ी घटना के मामले को वापस लेने का फैसला लेने के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रदेश सरकार के इस फैसले से बेगुनाहगारों की मौत के आरोपियों को सजा मिलती देखने की उम्मीद उन परिवारों की समाप्त हो गई है जिन्होंने अपने खो दिए थे। अब इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। जिलाधिकारी ने मुकदमा वापस लेने संबंधी आदेश मिलने की पुष्टि की है।
घटी थी घटना
हरिद्वार। यज्ञशाला स्थल पूरी तरह से ढका हुआ था और एक स्थान पर ही बड़ी संख्या में हवनकुंड बनवाए गए थे। एक साथ सैकड़ों हवनकुुंड में अग्नि प्रज्ज्वलित होने से धुआं ही धुआं हो गया। जब अनुयायियों का दम घुटने लगा तो भगदड़ मच गई। जिसमें 21 लोगों की जान चली गई।