परिवार में भाई ही था संपर्क में
सुरेंद्र के परिवार को लेकर भी कई बातें सामने आई हैं। उसके दो बेटे और एक बेटी बताए जा रहे हैं। बताया गया कि दिल्ली में रहने वाला उसका भाई लगातार उसके संपर्क में था और इस पूरे घटनाक्रम में उसके साथ खड़ा रहा। परिवार के अन्य सदस्यों ने उससे दूरी बना ली थी। पुलिस ने भी सुरेंद्र की मौत की सूचना उसके भाई को ही दी।
सत्यापन के लिए मांगी थी सुरेंद्र की आईडी
धर्मेंद्र के मुताबिक, चाय का खोखा किराये पर दिलाने के दौरान सत्यापन के लिए सुरेंद्र से उसकी आईडी मांगी गई थी। सुरेंद्र ने उस समय आईडी पास में नहीं होने की बात कही और बाद में आईडी देने की बात कही थी। इसके बाद खोखा के खुद को मालिक बताने वाले शख्स को गारंटी के तौर पर धर्मेंद्र ने अपनी आईडी दी थी।
डायबिटीज से पीड़ित था सुरेंद्र कोली
धर्मेंद्र के मुताबिक, सुरेंद्र डायबिटीज से पीड़ित था। हालांकि, हरिद्वार में वह सदाराम के नाम से रह रहा था। आसपास के लोगों और परिचितों को उसकी असली पहचान की जानकारी नहीं थी। ऐसे में सवाल यह भी है कि आखिर सदाराम के नाम से रह रहे सुरेंद्र कोली की हकीकत किसी को कैसे पता नहीं चली।
ठेकेदार से कराई थी बातचीत
चाय का खोखा दिलाने से पहले धर्मेंद्र कौशिक ने सुरेंद्र की सिडकुल निवासी ठेकेदार जय कश्यप से बातचीत कराई थी। सुरेंद्र के संपर्क में आए ठेकेदार जय कश्यप का परिचय भी एक महिला अधिवक्ता के माध्यम से कराया गया था। पुलिस अब सुरेंद्र के हरिद्वार आने के बाद उसके संपर्क में आए लोगों और उनके बीच हुई बातचीत की भी जानकारी जुटा रही है।
सरकारी जमीन पर बना था खोखा, होगी कार्रवाई
जिस खोखे में सुरेंद्र कोली का शव मिला, वह सरकारी जमीन पर बना होने की बात सामने आई है। चाय का खोखा किराये पर देने वाले व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस की रिपोर्ट के बाद अब संबंधित विभाग सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के तहत कार्रवाई करेगा।
सत्यापन और खुफिया विभाग की निष्क्रियता पर सवाल
सुरेंद्र कोली के सदाराम के नाम से रहने और चाय का खोखा संचालित करने के मामले ने पुलिस की सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल है कि हरिद्वार आने के बाद उसका सत्यापन हुआ था या नहीं? यदि हुआ था तो उसकी वास्तविक पहचान सामने क्यों नहीं आई। वहीं, खुफिया विभाग की स्थानीय स्तर पर सक्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अधिकारी खुद मान रहे हैं कि घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर जांच के दौरान सुरेंद्र कोली की पहचान सामने आई। खोखे में मिले बैग और दस्तावेजों की जांच के बाद पुलिस को उसके असली नाम का पता चला।