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गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजी निर्मला छावनी

Mon, 06 Mar 2017 10:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
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सोमवार देर शाम निर्मल छावनी अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठी। कंबल व्यापारी अमित दीक्षित की हत्या का सीन चीख चीखकर बयां कर रहा था कि बेहद ही सधे हुए अंजाम में वारदात को अंजाम दिया गया। जाहिर है कि, कातिल बेहद ही प्रोफेशनल थे और वे अपने मकसद में कामयाब रहे। कालोनी की मुख्य सड़क पर ही दुस्साहसिक ढंग से वारदात को अंजाम देकर शूटर फरार होने में कामयाब रहे।

कारोबारी अक्सर शाम को अपने घर चाय पीने के लिए आते थे। इससे यह साफ लग रहा है कि बदमाशों ने पहले रैकी की। घर से निकलने के बाद संभवत कारोबारी को शूटरों ने रोका होगा, क्योंकि गोलीकांड के बाद जब पुलिस पहुंची तब स्कूटी स्टार्ट थी। कुछ लोगों ने दबी जुबां में बोला भी कि शूटर तीन की संख्या में थे। वे कालोनी में पिछले कुछ देर पहले से टहल रहे थे पर पुष्टि नहीं हो पाई। शूटर वाल्मीकि बस्ती मेला अस्पताल की तरफ ही भागे थे। माना जा रहा है कि उनका दुपहिया वाहन उस मार्ग पर ही पार्क था। कारोबारी पर शायद दो असलहों से गोलियां दागी गई। इसकी वजह तीन गोली छाती पर लगना है और एक गोली सिर के पिछले हिस्से में लगी है।  शायद पहली गोली लगने के बाद कारोबारी ने अपना हाथ आगे किया था क्योंकि उसके अंगूठे को चीरते हुए एक गोली चली है। मृतक का अंगूठा लगभग गायब था।
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मृदुभाषी थे अमित
कंबल कारोबारी अमित बेहद ही मृदुभाषी थे। हर कोई कारोबारी की हत्या से सन्न था। कुछ लोग यह भी कहते सुने गए कि गलतफहमी में उसकी हत्या कर दी गई।
 
कारण नहीं रहा सूझ      
 कंबल कारोबारी की हत्या के कारण को लेकर किसी को कुछ नहीं सूझ रहा। परिजन फिलहाल कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है। दोस्त भी किसी भी तरह की रंजिश होने की बात से इंकार कर रहे हैं। हां, कुछ लोग तरह तरह के कयास लगाते रहे।

डीपीएस में शिक्षिका है पत्नी      
 कंबल कारोबारी की पत्नी रश्मि दिल्ली पब्लिक स्कूल में शिक्षिका है। करीब आठ साल की बेटी पलक्षी है। अमित की मां सहारनपुर में रहती हैं जबकि पिता का देहांत हो चुका है। एक भाई गुड़गांव में नौकरी करता है और बहन की शादी हो चुकी है।       

32 बोर का हुआ इस्तेमाल      
 कारोबारी की हत्या में शायद 32 बोर की पिस्टल का इस्तेमाल हुआ है। उसे चार गोली मारी गई है। एक गोली व्यापारी के कपड़ों में फंसी मिली है। इस लिहाज से उस पर कुल पांच गोली चलाई गई थी।
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जिसने भी सुना दौड़ा चला आया      
जिस किसी ने भी अमित  हत्याकांड की खबर सुनी वह जिला अस्पताल दौड़ा चला आया। जिला अस्पताल में व्यापारी वर्ग, क्षेत्रवासी, राजनीतिक दलों के लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। जैसे जैसे हत्याकांड की बात फैलती गई वैसे वैसे जिला अस्पताल कैंपस खचाखच भरता चला गया।
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