गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में कर रहे हैं हम साधना विषय पर सत्संग आयोजित
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने नवरात्र को आत्मचिंतन का विशेष अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यह आत्मपरिष्कार और आंतरिक शक्तियों के जागरण का भी महत्वपूर्ण समय है। डॉ. पण्ड्या गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयोजित सत्संग सभा को संबोधित कर रहे थे, जिसका विषय कर रहे हैं हम साधना था।
उन्होंने कहा कि श्रद्धा और समर्पण के साथ की गई साधना अत्यंत फलदायी होती है। ऐसी साधना व्यक्ति के विचारों में सकारात्मक परिवर्तन लाती है और उसके व्यवहार को भी बेहतर बनाती है। यह व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होती है। इस सत्संग सभा में देश-विदेश से आए 1000 से अधिक श्रद्धालु और साधक उपस्थित रहे।
डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने नौ शब्दों वाले गायत्री महामंत्र को वर्तमान युग की विभिन्न समस्याओं के समाधान का आध्यात्मिक आधार बताया। उन्होंने पूज्य गुरुदेव के चिंतन में व्यक्ति के उत्थान की व्यापक संभावनाएं निहित होने की बात कही। साथ ही, समाज और समूची मानवता के उत्थान की भी असीम संभावनाएं बताईं। उन्होंने नवरात्र साधना को आंतरिक उत्कृष्टता प्राप्त करने की एक सशक्त प्रक्रिया बताया। इसे चरित्र निर्माण के लिए भी एक मजबूत माध्यम बताया गया।