सरकारी प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में यदि किसी दिन मिड डे मिल नहीं बन पाया तो छात्र-छात्राओं को उसकी प्रतिपूर्ति दी जाएगी। जिसके तहत चावल और लागत खर्च बच्चों को उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षा विभाग ने इसी महीने से यह कवायद शुरू की है। इस बाबत सभी स्कूलों को चिट्ठी भेजी गई है। अकेले हरिद्वार जनपद में ही करीब डेढ़ लाख छात्र छात्राओं को मिड डे मिल दिया जाता है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत पहली से कक्षा आठ तक के छात्र-छात्राओं को दोपहर का भोजन स्कूल में मुफ्त दिया जाता है। प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले पहली से पांचवीं तक के बच्चों को 100 ग्राम चावल और 4.13 रुपये लागत खर्च तय किया गया है। वहीं जूनियर स्कूलों में छह से आठवीं तक 150 ग्राम प्रति छात्र चावल और 6.18 रुपये मिलता है। साल में 179 दिनों का बजट स्कूलों को जारी किया जाता है। हरिद्वार जनपद में प्राइमरी के एक लाख तीन हजार 643 और जूनियर स्कूलों में 48 हजार 739 छात्र-छात्राएं हर महीने मध्याह्न भोजन खाते हैं, लेकिन कभी भोजन माता के न आने से तो कभी सिलेंडर न होने के कारण खाना नहीं बन पाता। अगले दिन बच्चे को सिर्फ उसी दिन का खाना मिल पाता है।
अब बच्चे को उस दिन की प्रतिपूर्ति भी मिलेगी, जिस दिन उसे खाना नहीं मिल पाया। प्राइमरी स्कूल में 100 ग्राम चावल और 4.13 रुपये प्रति छात्र और जूनियर स्कूल में हर छात्र को 150 ग्राम चावल प्रतिपूर्ति के तौर पर दिए जाएंगे। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक दिनेश चंद्र डिमरी ने इस संबंध में सभी उप शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेजा है। जिसमें यह भी कहा गया है कि खाने की गुणवत्ता समय समय पर चेक की जाए और फूड टेस्टिंग रजिस्टर में उसकी एंट्री की जाएगी।
भोजन माताओं को भी ऑनलाइन भुगतान
सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन बनाने वाली भोजन माताओं को भी अब ऑनलाइन भुगतान किया जाएगा। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि भोजन माताओं को किसी भी सूरत कैश भुगतान न किया जाए। बैंक खाते में ऑनलाइन भुगतान के लिए भोजन माताओं के खाता नंबर और आईएफएससी कोड मांगे गए हैं। प्रभारी डीईओ बेसिक दिनेश चंद्र डिमरी ने इस बारे में डिप्टी बीईओ को लिखित निर्देश जारी किए गए हैं।
मिडडे मिल न बनने पर छात्र छात्राओं को प्रतिपूर्ति के तौर पर खाद्यान्न और कुकिंग कॉस्ट दी जाएगी। वहीं भोजन माताओं को भुगतान भी ऑनलाइन किया जाएगा। इस बारे में सभी उप शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश जारी किए गए हैं।
- दिनेश चंद्र डिमरी, प्रभारी डीईओ बेसिक हरिद्वार