देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि त्याग से ही आध्यात्मिक जीवन की सार्थकता है। इसमें जितनी त्याग की भावना है, वह उतना ही महान है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने त्याग को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं।
वे देसंविवि के मृत्युंजय सभागार में आयोजित गीतामृत की विशेष कक्षा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दीपावली के अवसर पर हमें बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए पटाखों का त्याग करना चाहिए। इससे एक ओर धन की बर्बादी नहीं होगी। दूसरी ओर प्रदूषण भी कम होगा। त्याग आंतरिक रूप से होना चाहिए। त्याग में प्रेम, सुख व संतुष्टि भी मिलती है।
देवसंस्कृति में हर्षोल्लास से मनाई धन्वंतरि जयंती
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय स्थित फार्मेसी और शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धन्वंतरि की जयंती आयुर्वेद के विकास में जुट जाने के आह्वान के साथ मनाई गई। फार्मेसी में हवन के साथ भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि धन्वंतरि भगवान विष्णु के 13वें अवतार हैं। दीर्घतपा के पुत्र और केतुमान के पिता हैं। वे देवताओं के वैद्य थे। उन्होंने कहा कि परमात्मा ने सर्वश्रेष्ठ मनुष्य काया दी है, तो उसे प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखकर जीवनोद्देश्य की दिशा में निरंतर गतिशील रहना चाहिए। डॉ. ओपी शर्मा, डॉ. गायत्री शर्मा, डॉ. शिवानंद साहू, डॉ. वीसी नायक, डॉ. गोपीवल्लभ पाटीदार, डॉ. अलका मिश्रा, डॉ. वन्दना श्रीवास्तव, डॉ. एसपी विश्नोई, डॉ. एके पांडेय आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वहीं, पर्यावरण संरक्षण के लिए गायत्री विद्यापीठ के करीब 500 बच्चों ने नई पहल की। विद्यापीठ के बच्चों ने पर्यावरण बचाने की मुहिम के साथ इको फ्रेंडली पर्व मनाने और एक-एक पौधा लगाने के संकल्प के साथ जनजागरण रैली निकाली। यह रैली विद्यापीठ से प्रारंभ होकर हरिपुर कलां, सप्तसरोवर क्षेत्र होते हुए शांतिकुंज पहुंची।