मातृसदन ने तीन दिन पहले गंगा में वन विकास निगम का खनन खोलने पर नैनीताल हाईकोर्ट में अवमानना का केस दायर किया है। इसमें प्रदेश के मुख्य सचिव, औद्योगिक विकास सचिव, जिलाधिकारी हरिद्वार, डीएफओ हरिद्वार और वन विकास निगम के डीएलएम को पक्षकार बनाया है।
मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा में खनन को लेकर बीते दिसंबर माह में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-5 लागू की थी। जिसके तहत गंगा में किसी भी तरह के खनन को पूर्ण प्रतिबंधित करते हुए क्रशरों को पांच किलोमीटर दूर हटाने के आदेश दिए गए हैं। आदेश के क्रियान्वयन को लेकर सीधे तौर पर जिलाधिकारी और एसएसपी की जवाबदेही तय की गई है। कई महीने तक भी प्रशासन इसे लागू नहीं करा पाया। तब फेरूपुर निवासी एक ग्रामीण ने इस संबंध हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। बीती तीन मई को याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा-5 सख्ती से लागू कराने के आदेश दिए थे। स्वामी शिवानंद ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी इसका क्रियान्वयन नहीं कराया, उल्टे 13 मई को श्यामपुर व चिड़ियापुर में वन विकास निगम का खनन खोल दिया गया। यह सीधे सीधे हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना हुई।
लिहाजा मातृसदन की तरफ से ब्रह्मचारी दयानंद ने मंगलवार को नैनीताल हाईकोर्ट में अवमानना का केस दायर किया। स्वामी शिवानंद ने बताया कि केस में मुख्य सचिव एस रामास्वामी, औद्योगिक विकास सचिव शैलेश बगोली, जिलाधिकारी हरिद्वार दीपक रावत, डीएफओ हरिद्वार एचके सिंह और वन विकास निगम के डीएलएम आईपीएस रावत को पक्षकार बनाया गया है। पत्रकार वार्ता के दौरान स्वामी शिवानंद ने अधिकारियों पर खनन माफिया से सांठगांठ के आरोप भी दोहराए।