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कुशल प्रबंधन से कम हो सकता है आपदा का प्रभाव

Thu, 05 Nov 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार के कॉलेज ऑफ  इंजीनियरिंग में हुई कार्यशाला में आपदा बचाव एवं  प्रबंधन रणनीतियां पर विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। आपदा के कारणों, प्रभाव और निराकरण आदि पर चर्चा की गई।
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कार्यशाला में आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर 44 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए और 50 से अधिक विषय विशेषज्ञों व 600 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कोर के महानिदेशक मेजर जनरल एके चतुर्वेदी ने कहा कि आपदाएं दो प्रकार की होती हैं एक प्राकृतिक एवं दूसरी मानव जनित। मानवजनित आपदाओं को एक स्तर तक रोका जा सकता है। प्राकृतिक आपदा को रोका तो नहीं जा सकता लेकिन कुशल प्रबंधन से उसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।
एमडीएनए दिल्ली के सलाहकार ब्रिगेडियर डा. बीके खन्ना ने कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 में पास हो चुका है और देश में कई संस्थाएं इस दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हमारे यहां बड़े-बड़े बिल्डर्स भवन निर्माणों में मानकों की अनदेखी करते हैं। टैक्सप्लास ग्रुप ऑफ कंपनीज के श्रेयांष जैन ने कहा आपदा प्रबंधन आज के युग का बहुत महत्वपूर्ण विषय है।
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उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीके गर्ग ने कहा कि उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील है। जो कि जोन चार में आता है। इस अवसर पर कोर स्कूल आफ मैनेजमेंट के निदेशक डा वीके जैन, कोर के महानिदेशक मेजर जनरल एके चतुर्वेदी, निदेशक एसएम, डा. वीके जैन, कुलसचिव राजेश कुमार, वैज्ञानिक सुशील कुमार, प्रो. राजेश चंद्रा,  नीना खन्ना, आईआईटी रुड़की के प्रो. योगेंद्र सिंह उपस्थित रहे ।
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