हरिद्वार। संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्रबंधकों ने बैठक कर सरकार की योजनाओं का विरोध किया है।
खड़खड़ी स्थित निर्धन निकेतन आश्रम में हुई बैठक में प्रबंधकों ने संस्कृत विद्यालयों को पूर्व की भांति विद्यालयों की पैतृक संस्थाओं की ओर से ही संचालि करने की मांग की गई। प्रबधंकों का कहना है कि संस्कृत शिक्षण संस्थान मूल रूप से धर्माचार्यों, संतों, अखाड़ों आदि की ओर से स्थापित 1860 के सोसायटी एक्ट के तहत संचालित हो रहे हैं। इनमें बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। निर्धन निकेतन आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज ने कहा कि सरकार के निर्णय का एकजुट होकर विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षण संस्थाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के रहने खाने की व्यवस्था संस्थाओं की ओर से की जाती है। संस्थाओं में बाहरी हस्तक्षेप का विद्यार्थियों पर खराब असर होगा। सरकार के निर्णय के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजा गया है। शासन प्रशासन के समक्ष भी विरोध दर्ज कराया जाएगा। जरूरत पड़ी तो न्यायालय में याचिका भी दायर करेंगे।
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