फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आसान नहीं होगा गबन की धनराशि तय करना

विज्ञापन
विज्ञापन
छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही एसआईटी के लिए गबन की धनराशि तय करना आसान नहीं होगा। हरिद्वार और देहरादून में साढे़ 56 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में 80 मुकदमे दर्ज हैं। अब इन मुकदमों के विवेचकों को साबित करना होगा कि किस संस्थान ने सरकार को कितनी धनराशि का चूना लगाया है। इसके बाद ही साफ हो पाएगा कि वास्तव में घोटाला कितने करोड़ का हैं। छात्रवृत्ति घोटाले की धनराशि को लेकर कयासबाजी किसी से छिपी नहीं है। हालांकि चर्चाएं तो 100 करोड़ के आसपास की रही है, लेकिन विवेचना के बाद सही तस्वीर सामने आ पाएगी। शासन के आदेश पर गठित एसआईटी प्रथम दृष्टया छात्रवृत्ति की धनराशि हड़पने के आरोप में 80 मुकदमे दर्ज करा चुकी है। इनमें 51 मुकदमे हरिद्वार जिले में दर्ज कराए गए हैं। मुकदमों में नामजद प्राइवेट संस्थानों को 375978189 करोड़ रुपये जारी किए गए। इसी तरह देहरादून में दर्ज 29 एफआईआर में प्राइवेट संस्थानों को 163105465 करोड़ रुपये आवंटित होने का जिक्र किया गया है। ऐसे में इन मुकदमों की विवेचना करने वालों के सामने यह साबित करने की चुनौती है कि जारी छात्रवृत्ति में से कितनी राशि फर्जी छात्र दर्शाकर वसूली गई है। साथ ही सरकारी धन हड़पने में सहयोग करने वाले विभागीय अधिकारियों का भी दोष निर्धारण करना होगा। हालांकि 60 के करीब संस्थानों के खिलाफ जांच अभी एसआईटी में विचाराधीन है। आने वाले दिनों में अन्य संस्थानों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी है।
विज्ञापन

किस शिक्षण संस्थान ने कितनी छात्रवृत्ति सही छात्रों को दी है और कितनी फर्जी तरीके से हड़पी है, यह सब विवेचना में ही साफ हो पाएगा। एसआईटी ने प्राथमिक जांच में आए तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई है।
विज्ञापन

-टीसी मंजूूनाथ, प्रभारी एसआईटी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें