- उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 32 छात्रों को प्रदान किए गोल्ड मेडल
- विश्वविद्यालय में 10 हजार दुर्लभ पुस्तकें दान करने पर जताया आभार
संवाद न्यूज एजेंसी
बहादराबाद। उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने 32 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और छह छात्रों को पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया।
राज्यपाल ने संस्कृत को नई तकनीक, शोध और नवाचार से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल ने संस्कृत को भारत की ज्ञान-चेतना और चिंतन परंपरा की प्रमुख वाहक बताया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में संस्कृत की वैज्ञानिक संरचना के आधार पर शोध की संभावनाएं बताईं।
राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत को पुस्तकालयों की अलमारियों से निकालकर डिजिटल संसार, शोध प्रयोगशालाओं और वैश्विक ज्ञान-विमर्श तक ले जाने की आवश्यकता है। संस्कृत के विद्यार्थियों के लिए अध्यापन, अनुवाद, शोध, प्रकाशन और डिजिटल मीडिया जैसे कई क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से ज्ञान बढ़ाने, संस्कारों को जीवन में उतारने, समाज सेवा, नवाचार अपनाने और राष्ट्र को सर्वोपरि रखने के पांच संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन भी किया। राज्यपाल ने पद्मश्री अभिराज राजेन्द्र मिश्र का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने विश्वविद्यालय को 10 हजार दुर्लभ पुस्तकें दान कीं।
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चार लोगों को दी गई मानद उपाधियां
समारोह में पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल, डॉ. अनुसूया प्रसाद पंत, प्रो. राम कुमार शर्मा और प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय को मानद उपाधियां दी गईं। राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा पूर्ण होने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के प्रति नई जिम्मेदारियों का भी अवसर है।
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संस्कृत के उत्थान में सामूहिक प्रयास की आवश्यकता : धन सिंह रावत
संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने संस्कृत को वैज्ञानिक और कंप्यूटर अनुकूल भाषा बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से संस्कृत मंत्रालय इसके प्रचार-प्रसार के लिए प्रयास कर रहा है। संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने संस्कृत के उत्थान में समाज और नई पीढ़ी की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य संस्कृत को शोध, शिक्षा और समाज के लिए उपयोगी ज्ञान का प्रभावी माध्यम बनाना है।