अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक प्रवीण भाई तोगड़िया ने कहा कि काशी में आठ फीट ऊंचे नंदी भगवान ज्ञानवापी में रोज महादेव की पूजा का इंतजार कर रहे हैं। अभी तहखाने में पूजा शुरू हुई है। शिवलिंग की पूजा शुरू हाेना बाकी है। उन्होंने कहा कि केवल पूजा का अधिकार ही नहीं पूरा ज्ञानवापी परिसर हिंदुओं को सौंपा जाना चाहिए।
रविवार को प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि हमें ज्ञानवापी तो चाहिए ही, भगवान महादेव के काशी विश्वनाथ का सम्मान भी वापस लाना होगा। संगठन ने तय किया है कि जैसे राम मंदिर बना, उसी तर्ज पर काशी-मथुरा और अन्य धार्मिक स्थल पुन: सृजित और विकसित किए जाएंगे। कहा कि काशी और मथुरा के मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी को अभियान नहीं चलाना है। रामलला के लिए पहले भी कारसेवकों ने लाठी-गोली खाई। अब जब सरकार में उनके अपने ही भाई हैं तो पूर्ण विश्वास है कि इन मुद्दों का हल भी जल्द निकलेगा।
उन्होंने कहा कि सभी शंकराचार्य का आशीर्वाद इस आंदोलन में मिला है। इसलिए सभी शंकराचार्य का सम्मान करके सनातन वैदिक परंपरा बढ़ाने का काम करेंगे। इस दौरान राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री ईश्वरी प्रसाद, क्षेत्र संगठन मंत्री सुभाष जोशी, जिलाध्यक्ष विवेक वर्मा, जिला महामंत्री अरविंद पांडे आदि शामिल रहे।
Iदेश में लागू किया जाए यूसीसीI
डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर चर्चा चल रही है। यह कानून पूरे देश में लागू होना चाहिए। वहीं, कैंसर दिवस पर उन्होंने कहा कि 1981 से वर्ष 1998 तक उन्होंने कैंसर अस्पताल में 10 हजार से ज्यादा रोगियों के ऑपरेशन किए। उस वक्त कैंसर रोग के मरीज भी कम थे और विशेषज्ञ भी। कहा कि कैंसर से मरीज मरता है तो आर्थिक तंगी से परिवार मर रहा है। सरकार ने आयुष्मान कार्ड से ऐसे मरीजों को जीवनदान दिया है।
Iअशोक सिंघल, महंत अवैद्यनाथ, रामचंद्र परमहंस को भी मिले भारत रत्नI
तोगड़िया ने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न का सम्मान बेहद सम्मानजनक निर्णय है। मांग की कि अशोक सिंघल, महंत अवैद्यनाथ, रामचंद्र परमहंस को भी भारत रत्न दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 500 साल में 25 पीढ़ियां राम मंदिर के लिए लड़ीं। 13 धर्म संसद द्वारा एक लाख से ज्यादा साधु-संतों ने आंदोलन में नेतृत्व किया। इसका यश इन्हीं साधु-संतों को जाता है।