चंडीघाट एवं बैरागी कैंप की सिंचाई विभाग के नियंत्रणाधीन गंगा नदी की सरकारी भूमि से अवैध कब्जों को हटाने की उम्मीद बढ़ गई है। राज्य सूचना आयोग ने उत्तराखंड सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता / विभागाध्यक्ष को आदेशित किया है कि जिलाधिकारी का सहयोग लेकर अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई करें।
सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत ने अपने आदेश में मुख्य अभियंता को गंगा नदी की सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए तीन महीने का समय दिया है। मुख्य अभियंता को निर्देशित किया गया है कि वह सिंचाई विभाग के नियंत्रणाधीन सरकारी भूमि पर अनाधिकृत कब्जों के संबंध में सिंचाई खंड हरिद्वार के अधिशासी अभियंता से स्थल का सर्वेक्षण कराकर अनाधिकृत कब्जों को चिह्नित करा दें और फिर जिलाधिकारी का सहयोग लेकर अतिक्रमण को हटवाने की कार्रवाई करें। सूचना आयोग के आदेश के अनुुपालन में सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता (एचओडी) के स्टाफ असफर ने अधिशासी अभियंता को गंगा नदी चंडीघाट व बैरागी कैंप की सरकारी भूमि के अनाधिकृत कब्जों को चिह्नित करने का आदेश जारी कर दिया है।
सिंचाई खंड के उप राजस्व अधिकारी एनएस कुंडरा ने बताया कि सूचना आयोग के आदेश को लेकर मुख्य अभियंता का पत्र अधिशासी अभियंता को प्राप्त हो गया है। विभाग ने अवैध कब्जों को चिह्नित कर सूची बना रखी है। मुख्य अभियंता व जिलाधिकारी से अतिक्रमण हटाने के लिए समय निर्धारित कर कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। गौरतलब है कि चंडीघाट में गंगा नदी के अपस्ट्रीम व डाउनस्ट्रीम में गंगा नदी की भूमि अवैध कब्जे बढ़ रहे हैं। कुष्ठ रोगियों के बच्चों की पढ़ाई लिखाई तथा विभिन्न सेवा पटल चलाने के नाम पर बड़ा साम्राज्य का विस्तार कर दिया है। इसकी आड़ के सैकड़ों की संख्या झुग्गी-झोपड़ी बस्ती भी आबाद हो चुकी है। हजारों की आबादी गंगा नदी में मलमूत्र त्याग कर गंगा को प्रदूषित कर रही है। स्वयंसेवी संस्था ने नदी में पक्का निर्माण कर गंगा नदी के अंदर ही सीवर टैंक भी बना दिए हैं।