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शादी ना बरात तो कैसे चले बैंड वालों का घरबार

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कोरोना महामारी के कारण समाज के हर वर्ग की आर्थिकी बिगड़ गई है। इनमें सबसे ज्यादा शादी समारोह और धार्मिक आयोजनों की शान कहे जाने वाले बैंडबाजे वाले भी हैं। चार महीने से शादियां पहले की तरह नहीं हो रही और धार्मिक आयोजनों पर रोक है। ऐसे में बैंड पार्टियों से जुड़े लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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कोरोना वायरस फैलने के बाद शुरू हुए लॉकडाउन के चलते सभी उद्योग धंधे पूरी तरह प्रभावित हुए। अब अनलॉक टू के बाद कुछ उद्योग धंधे तो चलने लगे पर कई कामधाम ऐसे हैं जो अब भी शुरू नहीं हो सके। लॉकडाउन लगने के बाद से विवाह, जुलूस और धार्मिक बरात आदि आयोजनों पर रोक है। अधिकांश शादियों की तिथि आगे बढ़ा दी गई है। इन दिनों जो शादी समारोह हो भी रहे वह बेहद सादगी ढंग से किए जा रहे। इन शादी समारोह में बैंडबाजों की जरूरत ही नहीं पड़ रही है। अकेले बहादराबाद क्षेत्र में करीब एक दर्जन से ज्यादा छोटी-बड़ी बैंड पार्टियां हैं। प्रत्येक बैंड पार्टी में 10 से 20 लोग जुडे हैं। बैंड संचालक मास्टर टीटू अरोड़ा का कहना है कि कर्ज लेकर गर्मी के सीजन में होने वाली शादियों और अन्य आयोजनों की तैयारी की थी। लॉकडाउन की वजह से एक बैंड पार्टियों को 20 से 25 लाख का रुपये का नुकसान हुआ है। सभी बैंड पार्टियों के पास जून से लेकर जुलाई तक की बुकिंग थी। लॉकडाउन के चलते यह बुकिंग रद्द हो गई थी। एक और बैंड संचालक सलमान बताते हैं कि एक तो पुरानी तमाम बुकिंग निरस्त हो गई है और दूसरा कोई अब आगे की बुकिंग नहीं आ रही हैं। बैंड मालिक शफीक अहमद और रुस्तम ने बैंड से जुड़े लोगों को संकट से उबारने को आर्थिक मदद की मांग उठाई है।
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