गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में अब बॉटनी एंड माइक्रो बायोलॉजी डिपार्टमेंट के छात्रों को वेदों में निहित ज्ञान-विज्ञान भी पढ़ाया जाएगा। इस डिपार्टमेंट में अब वैदिक माइक्रोबायोलॉजी का पाठ्यक्रम लागू किया गया है। इसे एक यूनिट के रूप में बीएससी और एमएससी प्रथम वर्ष के छात्रों को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाना शुरू किया गया है।
विश्वविद्यालय के बॉटनी एंड माइक्रो बायोलॉजी डिपार्टमेंट के अध्यक्ष प्रो. आरसी दुबे ने दावा किया कि गुरुकुल विश्वविद्यालय देश का ऐसा अकेला विश्वविद्यालय है, जिसने यह पाठ्यक्रम तैयार कर उसे लागू किया है। प्रो. दुबे के मुताबिक यह पाठ्यक्रम वैज्ञानिक दृष्टि से पूरे सूक्ष्म जैविकीय ब्रह्मांड को जोड़ते हुए सृजित किया गया है।
इसमें सूक्ष्म जीवों एवं ब्रह्मांड की उत्पत्ति, सूक्ष्म जीवों की व्याप्ति एवं उनका वर्गीकरण, मानव स्वास्थ्य रोगकालिक कृमि, कृमियों के द्वारा उत्पन्न व्याधियों तथा कृमियों के विनाश की वैज्ञानिकता पर चयनित वैदिक मंत्रों को हिन्दी और अंग्रेजी में अर्थ सहित उचित स्थानों पर चित्रों के माध्यम से मौलिक रूप में समझाया गया है।
प्रो. दुबे के अनुसार पिछले कई साल से वैदिक ग्रंथों का अध्ययन कर सूक्ष्म जैविकीय संबंधी मंत्रों को खोजकर वैदिक माइक्रो बायोलॉजी की एक पुस्तक भी लगभग तैयार कर दी गई है, ताकि छात्रों को वेद मंत्रों में निहित प्राचीन वैज्ञानिक ज्ञान का अध्ययन आसानी से कराया जा सके।
आर्य प्रतिनिधि सभाएं इस कार्य की सराहना करती हैं। जिस मकसद के लिए गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना स्वामी श्रद्धानंद ने की थी, वैदिक माइक्रोबायोलॉजी का पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय में लागू करना उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
-रामपाल आर्य, प्रधान, आर्य हरियाणा