नाबालिग का अपहरण कर दुराचार करने के आरोपी को पंचम अपर सत्र न्यायाधीश राहुल गर्ग ने सात वर्ष के कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की धनराशि में से पांच हजार रुपये पीड़िता को देने के आदेश दिए गए।
शासकीय अधिवक्ता रामसिंह राणा ने बताया कि पीड़िता के पिता ने थाना झबरेड़ा में 25 मई 2012 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि उसकी नाबालिग पुत्री 24 मई 2012 की रात्रि करीब दस बजे से लापता है। काफी तलाश करने पर उसका कुछ पता नही चला। 25 मई 2012 को उसे थाना झबरेड़ा ग्राम सढोली निवासी दीपक पुत्र कृष्णा के साथ देखा गया था।
पुलिस ने रिपोर्ट लिखकर घटना के नौ दिन बाद पीड़िता को हरिद्वार अस्पताल से दीपक उसकी बहन अलकेश व जीजा श्यामवीर पुत्र सुनहरा निवासी मुबारकपुर के पास से बरामद किया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ षड्यंत्र रचकर अपहरण कर दुराचार करने आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से 11 गवाह पेश किए गए।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने दीपक को दोषी पाते हुए सात वर्ष के कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की धनराशि में से पांच हजार रुपये पीड़िता को देेने के आदेश दिए। सहआरोपी अलकेश उर्फ गीता पत्नी श्यामवीर व श्यामवीर पुत्र सुनहरा को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।