हरिद्वार। खनन को लेकर चल रहे घटनाक्रमों के बीच मंगलवार को नया मोड़ आ गया है। प्रशासन ने गंगा में खनन रोकने का भरोसा दिलवाकर सोमवार शाम मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती और ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की तपस्या तो समाप्त करवा दी लेकिन मंगलवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि प्रदेश सरकार वैज्ञानिक तरीके से खनन करवाने के पक्ष में है।
निर्मल अखाड़े के दिवंगत संत महेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के साथ हरिद्वार पहुंचे मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से वार्ता में कहा कि खनन किया जाना जरूरी है। हरिद्वार के खड़खड़ी क्षेत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वहां गंगा की धारा इतनी भर चुकी है कि जब भी गंगा करवट बदलेगी तो वहां का एक बड़ा हिस्सा साफ हो जाएगा। वे खनन से सरकार को मिलने वाले राजस्व और लोगों के रोजगार की अनदेखी तो कर सकते हैं लेकिन जानमाल की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि खनन सामग्री चोरी करने वालों के खिलाफ प्रदेश सरकार कार्रवाई कर रही है। कई स्टोन क्रशर सीज किए गए और लगातार कार्रवाई की जा रही है।
देहरादून में स्मार्ट सिटी बनाने के लिए चाय बागान की भूमि पर भाजपा की ओर से सवाल उठाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि या तो भाजपा कहे कि यह कंसेप्ट गलत है या फिर कहीं और इसके लिए भूमि उपलब्ध करवाएं। जहां भी भूमि उपलब्ध कराई जाएगी सरकार वहां इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए काम करेगी। फिलहाल भूमि वहीं उपलब्ध है लेकिन अधिकारियों को उन्होंने अन्य स्थानों पर भी विकल्प तलाशने के बारे में आदेश किया गया है। उन्होंने कहा कि अर्द्धकुंभ मेले का कोई भी काम प्रभावित नहीं होगा।