हरिद्वार। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता अहंकार रहित निष्काम कर्म करने की शिक्षा देती है। वे कनखल स्थित एक बारात घर में अध्यात्म चेतना संघ की ओर से आयोजित गीता महोत्सव को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हमारे आचार्यों ने श्रीमद्भगवद्गीता को आधार बनाकर जिन भाष्यों की रचना की है, उनका एक ही निष्कर्ष निकलता है कि गीता कर्म का ही नहीं अपितु अहंकार को त्यागने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि गीता भगवान श्रीकृष्ण के श्रीमुख से निकला पावन ग्रंथ है जो संशयों ओर संसार की माया में लिप्त जीव को मुक्त कराती है। साथ ही गुरुजनों के शरणागत होने का आदेश देती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कोर कालेज के चेयरमैन जेसी जैन ने भी गीता को ज्ञान का भंडार बताया। महोत्सव में गीता ज्ञान परीक्षा के उत्तीर्ण छात्र छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। डा. सुनील बत्रा के संचालन में हुए कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष एचके वाधवा, महामंत्री ब्रजेश शर्मा, अशोक सरदार, महावीर प्रसाद अग्रवाल, हरिगोपाल शास्त्री, अजय कौशिक, गंगा सभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा गांधीवादी, अंशुल जैन, अविनाश चंद्र ओहरी, आचार्य रविदेव शास्त्री, पूर्व मंत्री नारायण सिंह रैना, मनमोहन जैन, जगदीश लाल पाहवा, श्रृयांश जैन, संतोष जैन, इंद्र प्रकाश अग्रवाल, विशाल शर्मा, रविंद्र सिंघल समेत अनेक लोग मौजूद रहे।