भगवती गंगा का अध्यात्म में बहुत ऊंचा स्थान है। ऋग्वेद से लेकर उपनिषदों और अनेक पुराणों में गंगा का विशद वर्णन किया गया है। ब्रह्मलोक में जन्मी, कैलाश में शिव की जटाओं से होती हुई गंगा सागर तक पहुंची गंगा के तटों पर आस्था के अनेक आयाम हैं। राधाकृष्ण के महारास से जन्मी गंगा अनंत काल से बह रही ऐसी जीवंत धारा हैं, जिसे अब न्यायालय ने भी जीवित व्यक्ति का दर्जा प्रदान किया है।
गंगा को जीवंत न माना जाता तो उनका विवाह शांतनु से न हुआ होता। तब भीष्म पितामह जैसे गंगा पुत्र भी जन्म न लेते। गंगा और यमुना के तटों पर वर्ष भर करोड़ों श्रद्धालु एकत्र होकर उन्हें मां पुकारते हैं। मां सदा जीवंत होती है। अपौरुषेय कहे जाने वाले वेदों में गंगा के अनेक रूपों का वर्णन किया गया है। यह नदी नहीं अपितु श्रद्धालुओं की आस्था के अनुसार ब्रह्मलोक में जन्मी ऐसी अद्भुत मां है, जिसने सारे संसार को जन्म दिया। गंगा और उसकी बहन यमुना के कारण ही सरस्वती, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, गोदावरी, शिप्रा आदि नदियों के तटों पर बसे तीर्थ पुरोहितों को गंगा पुत्रों का दर्जा मिल गया।
गंगा तो कभी मृत थी ही नहीं, वे तो सदा जीवंत थी और अध्यात्म तथा आस्था के सागर में आज भी जीवंत बह रही है। गंगा की महिमा का वर्णन ब्रह्मवर्तैत पुराण, मत्स्य पुराण तथा स्कंद पुराण में सर्वाधिक मिलता है। स्कंद पुराण का केदार खंड तो गंगा की महिमा से भरा हुआ है। प्रसिद्ध चीनी यात्री व्हेनसांग, फ्रांसिसी घुमक्कड़ टॉम इलियट तथा ब्रिटिश इतिहासकार कनिंघम ने अपने अपने युग में गंगा तटों का भ्रमण किया और गंगा को जीवंत महामाता बताया। गंगा के मातृ स्वरूप से बादशाह अकबर इतने प्रभावित थे कि अपने अकबरनामे में उन्होंने गंगा की जीवित महत्ता पर पूरा अध्याय लिखा। यही नहीं अकबर के लिए प्रति दिन इसी हरिद्वार से हाथियों पर गंगा जल ले जाया जाता था, जिसे वे पीने और भोजन में इस्तेमाल करते थे।
जिस प्रकार इस पावन धरती के कण कण में भगवान हैं, उसी प्रकार कण कण में शिव और गंगा हैं। गंगा की अनंत यात्राएं वर्ष भर चलती हैं। गंगा के तटों पर करोड़ों श्रद्धालुओं के मेले इसलिए भरते हैं कि वे साक्षात वरदान देती ग्रं। यमुना न होती तो वृंदावन और मथुरा के यमुना तट भी न होते। यमुना न होती तो राधा और कृष्ण का मिलन भी न होता। कृष्ण का तो समूचा अस्तित्व ही यमुना किनारे पल्लवित हुआ। गंगा और यमुना ऐसी जीवंत मातृ नदियां हैं, जिन्हें मनुष्य ने कलुषित किया है। अब उच्च न्यायालय के आदेश से गंगा के प्रति जागरुकता का एक नया अभियान प्रारंभ होगा। मानव मात्र के लिए यह अभियान कल्याणकारी साबित होगा।