गंगा देती है निरंतरता का संदेश
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हरिद्वार। बिहार के राज्यपाल महामहिम रामनाथ कोविंद ने कहा कि प्रत्येक मंथन से अच्छी बुरी दोनों वस्तुएं निकलती हैं। मानव जीवन की सफलता इसी में है कि हम अच्छी बातों को अंगीकार करें। अर्द्घकुंभ मंथन ऐसा मंच है जिससे देश को नई दिशा विद्वानों के विचारों से मिल रही है। जीवनदायिनी गंगा जीवन में निरंतर प्रवाह का संदेश देती है जो भारत की जीवन रेखा है। जिसके तट पर अनगिनत संस्कृतियों सभ्यताओं का सृजन और पतन हुआ है। भारतीय संस्कृति के विकास में गंगा जहां पापनाशिनी है, वहीं अर्थव्यवस्था और आजीविका साधन भी है इसमें कोई संदेह नहीं है।
सोमवार को वह चंडीघाट स्थित दिव्य प्रेम सेवा मिशन की ओर से अर्द्घकुंभ मंथन के अंतर्गत आयोजित व्याख्यान माला की चतुर्थ श्रृंखला में भारतीय संस्कृति के विकास में गंगा की महत्ता विषय पर बोल रहे थे। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल ने कहा कि गंगा हजारों वर्षों से भारतीय संस्कृति का पुंज प्रवाह है जो भारत को धार्मिक, सांस्कृतिक, वैचारिक एकता के सूत्र में बांधती है। उन्होंने गंगाजल के विषय में कहा कि अकबर से लेकर औरंगजेब जैसे मुगल बादशाह गंगाजल का उपयोग करते थे। जो इसकी पवित्रता को सिद्ध करते हैं। भारत में आने वाले विश्व के दार्शनिकों व लेखकों ने गंगाजल को अमृत के समान बताया है। रहीम ने गंगा की स्तुति बडे़ ही भावपूर्ण रूप से की है। जो गंगा को धर्म संप्रदाय और संकीर्ण मानसिकता से सर्वोपरि सिद्ध करती है। अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि गंगा राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र की सांस्कृतिक प्रवाह, दर्शन का विषय है। पूरा देश गंगा पर एकमत है। गंगा का प्रवाह अविरल और निर्मल रहे यही गंगा की आकांक्षा है। उन्होंने गंगा की निर्मलता के लिए किए जा रहे कार्यों योजनाओं की जानकारी भी दी। संत विजय कौशल महाराज ने गंगा जी की धार्मिक महत्ता बताई। इस अवसर सिने कलाकार मनोज जोशी, सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, पूर्व मंत्री शिवप्रताप शुक्ला, पूर्व सांसद मनोहरकांत ध्यानी, अजेंद्र अजय, पंकज सहगल, विमलकुमार, पूर्व सांसद अशोक चंदेल, डा. महावीर अग्रवाल, गंगाशरण मददगार, विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, अभयपाल सिंह, उमेश निगम, जुगुल किशोर तिवारी, जीएस गौतम, ओमप्रकाश जमदग्नि, कमला जोशी, पीएस गिल, पंकज चौहान, संजय सिंह, यशवंत सिंह आदि शामिल हुए।