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Haridwar News: प्राधिकरण के सूचना अधिकारी पर दस हजार रुपये का जुर्माना

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- सूचना देने में देरी और भ्रामक जानकारी उपलब्ध कराने का आरोप
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- आरटीआई क्लब के सदस्य ने आयोग में की थी मामले की शिकायत
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। सूचना आयोग ने हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के लोक सूचना अधिकारी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना सूचना देने में देरी और भ्रामक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए लगाया गया है। आयोग ने उपाध्यक्ष हरिद्वार विकास प्राधिकरण को भी मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि आरटीआई क्लब उत्तराखंड के सदस्य अजीत सिंह चौहान ने यह शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने हरिद्वार की आवासीय कॉलोनियों में नियम विरुद्ध बने बहुमंजिला होटलों के खिलाफ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। वर्ष 2024 में प्राधिकरण ने उच्च न्यायालय में शपथपत्र दिया था कि गायत्री विहार कॉलोनी का भू-उपयोग व्यावसायिक हो गया है। इस पर अजीत सिंह ने प्राधिकरण से भू-उपयोग परिवर्तन से संबंधित तीन बिंदुओं पर सूचना मांगी थी।
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आरोप है कि प्राधिकरण के लोक सूचना अधिकारी ने निर्धारित अवधि के बाद 36 दिन की देरी की और प्रथम अपील के बाद अतिरिक्त शुल्क की मांग की। उन्होंने 29 जुलाई, 2025 को आवेदक को भ्रामक सूचना भेजी। दूसरी अपील के बाद भी 28 अक्तूबर, 2025 को वही भ्रामक सूचना दोबारा भेजी गई।
मामले की सुनवाई करते हुए आयुक्त दलीप सिंह कुंवर की चेतावनी के बाद तत्कालीन सचिव 23 जनवरी, 2026 को आयोग में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि गायत्री विहार का भू-उपयोग आवासीय से व्यावसायिक में बदलने का कोई दस्तावेज प्राधिकरण के पास नहीं है।
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उच्च न्यायालय में दिया गया गलत शपथपत्र
सचिव की दी गई जानकारी से स्पष्ट हुआ कि हरिद्वार विकास प्राधिकरण ने उच्च न्यायालय उत्तराखंड में गलत शपथपत्र दाखिल किया था। यह मामला अभी भी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। आयोग ने लोक सूचना अधिकारी प्रशांत सेमवाल को विलंब और भ्रामक सूचना देने का दोषी पाया। उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। प्रशांत सेमवाल ने आयोग को बताया कि सूचना आवेदन 7 मई, 2025 को विभाग में प्राप्त हुआ था। हालांकि, उन्हें यह आवेदन 13 मई, 2025 को मिला। इस देरी की विभागीय जांच के लिए उपाध्यक्ष हरिद्वार विकास प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं। यह जांच लोक सूचना अधिकारी के स्तर पर हुई देरी और कार्रवाई से संबंधित होगी।
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