अमेरिकन और यूरोपियन देशों में होने वाला ड्रेगन फ्रूट और ब्ल्यू बेरी जनपद के किसानों की आमदनी का जरिया बनेगा। दोनों फलों को जनपद में उगाने के लिए पहले चरण में पांच-पांच हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। उद्यान अधिकारियों का दावा है कि ड्रेगन फ्रूट और ब्ल्यू बेरी से किसानों की आय दोगुना करने में काफी मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना में किसानों को अभी तक स्ट्रोबेरी, आंवला, अमरूद, आम, लीची, कटहल आदि पर ही अनुदान दिया जाता है। इस बार ड्रेगन फ्रूट और ब्ल्यू बेरी को भी शामिल किया गया है। ब्ल्यू बेरी झाड़ीनुमा पेड़ होता है। इसका फल जामुन के आकर का होता है। इसका उद्गम स्थल नार्थ अमेरिका है। यह अफ्रीका और यूरोप में भी अच्छी तादाद होता है। जबकि ड्रेगन फ्रूट एक पेड़ होता है। यह यूरोपियन देशों में होता है।
पिछले कुछ सालों से ड्रेगन फ्रूट और ब्ल्यू बेरी की खेती देश में सिक्कम, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश और नार्थ ईस्ट के प्रदेशों में हो रही है। अब योजना के तहत दोनों फलों के पेड़ों को उगाने की तैयारी की जा रही है। इन पेड़ों को लगाने का उपयुक्त समय जुलाई-अगस्त का महीना है। इसलिए विभाग किसानों का चयन करके योजना का अमलीजामा पहनाने के लिए लगा हुआ है। उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दोनों ही फलों का उत्पादन कर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
-----------------
तीसरे साल फल देना शुरू कर देते हैं पेड़
उद्यान विभाग की माने तो ब्ल्यू बेरी और ड्रेगन फ्रूट का पेड़ फल के बीज और कलम से तैयार किया जा सकता है। पेड़ तीसरे साल फल देना शुरू कर देते हैं। फल सीजन अगस्त से सितंबर तक चलता है। दोनों ही पेड़ों के लिए जनपद का मौसम अनुकूल होने के कारण अधिकारी इन्हें किसानों के लिए बेहद लाभदायक बता रहे हैं।
---------
इम्यूनिटि बढ़ाने में कारगर हैं दोनों फल
मुख्य उद्यान अधिकारी नरेंद्र यादव का कहना है कि दोनों ही फल इम्यूनिटि बढ़ाने में काफी कारगर हैं। इसलिए कोरोनाकाल में इनकी डिमांड निरंतर बढ़ रही है। ब्ल्यू बेरी तो दिल व आंखों की बीमारियों और युवा अवस्था को बनाए रखने में लाभदायक होता है। त्वचा को साफ सुधार बनाए रखने में मदद करता है।
-------
उत्तराखंड में अनेक पर्यटन स्थल है। यहां विदेशी पर्यटक आते हैं। इसलिए देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी समेत चंडीगढ़, दिल्ली में इनकी अच्छी खासी डिमांड रहेगी। फलों के दाम भी अच्छे मिलते हैं। पहली बार कम मात्रा में लगवाए जा रहे हैं। धीरे-धीरे इनका विस्तार कर अधिक किसानों को लाभ दिलाया जाएगा।
- नरेंद्र यादव, मुख्य उद्यान अधिकारी, हरिद्वार