डेंगू के केस आने अभी बंद नहीं हुए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभियान बंद कर दिए हैं। हालात ये है कि हरिद्वार में डेंगू से मौत होनेे के बाद मुख्यमंत्री ने तो अधिकारियों को बुलाकर रिपोर्ट तलब की, इसके बाद भी धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा। यहां तक चार दिन पहले डेंगू से कनखल की युवती की मौत होने पर उनके घर तक भी स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंच सकी।
बृहस्पतिवार को डेंगू के 10 मरीजों के मामले सामने आए। अब तक डेंगू के 1400 मरीजों के मामले जनपद में हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद थी कि अक्तूबर के अंतिम सप्ताह तक डेंगू के मामले स्वत: समाप्त हो जाएंगे। लगातार मरीजों के मामले आने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभियान बंद कर दिए हैं। जागरूकता कार्यक्रम करने वाली टीम के साथ फॉगिंग कार्य भी पूरी तरह से बंद हो गया है। यहां तक कि चार दिन पहले कनखल निवासी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी की भतीजी नुपूर की डेंगू से मौत हो जाने पर भी उनके घर तक स्वास्थ्य विभाग का कोई कर्मी तक नहीं पहुंचा। जबकि देहरादून में मात्र डेंगू के मरीज आते ही टीम घर पर पहुंच कर छिड़काव आदि कार्य कर रही है। दूसरे अब तक करीब 1200 मरीजों के सैंपल एकत्रित हो चुके हैं, लेकिन उनका एलाइजा तक नहीं किया जा सका है।
डेंगू के मरीजों में कमी आई है। ठंड बढ़ने से लार्वा स्वत: समाप्त हो जाएगा। जिन स्थानों पर अब डेंगू के मरीजों के मामले आएंगे वहां पर टीम भेजी जाएगी। एलाइजा शुक्रवार को लगवाया जाएगा, ताकि मरीजों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
डा. बीएस जंगपांगी, सीएमओ, हरिद्वार।